राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत यूपी के स्कूलों में बालवाटिका को लेकर नई गाइडलाइन, देखें आदेश

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पूर्व प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए विद्यालयों में बालवाटिका के संचालन एवं व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को खेल एवं गतिविधि आधारित वातावरण में सीखने का अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें कक्षा-1 की औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार करना है।
शासन की ओर से जारी निर्देशों में बालवाटिका में सुरक्षित एवं बाल-मित्र वातावरण तैयार करने, आवश्यक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने, खेल आधारित गतिविधियां कराने, बच्चों के नामांकन एवं उपस्थिति बढ़ाने तथा उनके सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पूर्व प्राथमिक शिक्षा पर जोर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा व्यवस्था के पुनर्गठन के तहत 5+3+3+4 की संरचना निर्धारित की गई है। इसमें प्रारंभिक पांच वर्षों में तीन वर्ष की पूर्व प्राथमिक शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। इसी उद्देश्य से निपुण भारत मिशन के अंतर्गत प्री-प्राइमरी से कक्षा-2 तक के बच्चों के लिए बुनियादी भाषा एवं गणितीय क्षमताओं के विकास पर कार्य किया जा रहा है।
जारी निर्देशों के क्रम में बालवाटिका के माध्यम से बच्चों को उनकी आयु एवं विकास के स्तर के अनुरूप गतिविधियां कराई जाएंगी। इसका उद्देश्य बच्चों में प्रारंभिक भाषा, साक्षरता एवं संख्याज्ञान के साथ-साथ शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास को मजबूत करना है।
बालवाटिका में सुरक्षित और बाल-मित्र वातावरण होगा तैयार
विद्यालयों में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए सुरक्षित कक्षा-कक्ष अथवा उपयुक्त स्थान की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। बालवाटिका का वातावरण बच्चों के अनुकूल होना चाहिए, ताकि वे बिना किसी दबाव के खेलते हुए सीख सकें।
बालवाटिका में बच्चों की गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए बैठने, खेलने और सीखने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को विद्यालय के वातावरण से सहज रूप से जोड़ना और उनमें सीखने के प्रति रुचि विकसित करना है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्री और ईसीसीई एजुकेटर की रहेगी महत्वपूर्ण भूमिका
बालवाटिका के संचालन में आंगनबाड़ी कार्यकत्री, ईसीसीई एजुकेटर तथा प्री-प्राइमरी नोडल अध्यापक की महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित की गई है। इनके माध्यम से बच्चों के लिए निर्धारित गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित किया जाएगा।
निर्देशों में कहा गया है कि बच्चों को औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से निर्धारित गतिविधियों को नियमित रूप से कराया जाए। आयु वर्ग 3 से 6 वर्ष के बच्चों के विकास के छह प्रमुख क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए गतिविधियों की योजना तैयार की जाएगी।
चार लर्निंग कॉर्नर विकसित किए जाएंगे
बालवाटिका में बच्चों के सीखने को अधिक प्रभावी और रुचिकर बनाने के लिए अलग-अलग लर्निंग कॉर्नर विकसित करने पर जोर दिया गया है। प्रत्येक बालवाटिका में ब्लॉक कॉर्नर, पुस्तक कॉर्नर, कला/क्राफ्ट कॉर्नर तथा परफॉर्मेंस/नाटक कॉर्नर विकसित किए जाने हैं।
इन लर्निंग कॉर्नर के माध्यम से बच्चों को स्वतंत्र रूप से खेलते और गतिविधियों में भाग लेते हुए सीखने का अवसर मिलेगा। इससे बच्चों की रचनात्मकता, कल्पनाशक्ति, भाषा कौशल और सामाजिक व्यवहार के विकास में सहायता मिलेगी।
खेल आधारित गतिविधियों से बच्चों को कराया जाएगा शिक्षित
बालवाटिका में शिक्षण प्रक्रिया को केवल किताबों तक सीमित न रखते हुए खेल एवं गतिविधि आधारित बनाया जाएगा। बच्चों की आयु के अनुरूप खेल, कहानी, कला, अभिनय और अन्य गतिविधियों के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
निर्देशों के अनुसार बालवाटिका में बच्चों को विकास के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इससे बच्चों में सीखने की स्वाभाविक रुचि विकसित होगी और वे विद्यालय की औपचारिक शिक्षा के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।
बच्चों की प्रगति का समग्र प्रगति पत्र तैयार होगा
बालवाटिका में नामांकित प्रत्येक बच्चे की प्रगति पर नियमित रूप से नजर रखी जाएगी। इसके लिए समग्र प्रगति पत्र (Holistic Report Card) नियमित रूप से भरे जाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके माध्यम से बच्चे की सीखने की क्षमता और विभिन्न विकासात्मक क्षेत्रों में उसकी प्रगति को देखा जा सकेगा। अभिभावकों को भी वर्ष में कम से कम दो बार विद्यालय बुलाकर उनके बच्चे की प्रगति के बारे में जानकारी देने की व्यवस्था की जाएगी।
आयु-उपयुक्त अभ्यास पुस्तिकाएं और शिक्षण सामग्री मिलेगी
बालवाटिका में नामांकित 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए उनकी आयु के अनुरूप अभ्यास पुस्तिकाएं एवं शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रारंभिक भाषा एवं गणित के विकास के लिए निर्धारित सामग्री के साथ कला एवं क्राफ्ट से संबंधित सामग्री भी बच्चों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों को लिखने-पढ़ने की औपचारिक प्रक्रिया से पहले आवश्यक आधारभूत कौशल विकसित करने में मदद करना है।
बाल-मित्र फर्नीचर की व्यवस्था पर जोर
बालवाटिका में छोटे बच्चों की आयु और शारीरिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बाल-मित्र फर्नीचर की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। बच्चों के बैठने की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे उन्हें गतिविधियों में भाग लेने में सुविधा हो।
बैठने की उचित व्यवस्था के साथ बच्चों के सीखने एवं शारीरिक विकास से संबंधित गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
प्रिंट-रिच वातावरण और टीएलएम की व्यवस्था
बालवाटिका में प्रिंट-रिच वातावरण तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही टीएलएम यानी शिक्षण-अधिगम सामग्री तथा बच्चों के प्रयोग के लिए आवश्यक स्टेशनरी की उपलब्धता एवं नियमित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
इस व्यवस्था से बच्चों को आसपास उपलब्ध सामग्री के माध्यम से अक्षर, शब्द, चित्र, संख्या और अन्य प्रारंभिक अवधारणाओं को समझने में सहायता मिलेगी।
बच्चों के शारीरिक विकास के लिए खेल सामग्री उपलब्ध होगी
बालवाटिका में बच्चों के शारीरिक विकास को भी प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए विद्यालय में खेलने के स्थान और आउटडोर खेल सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बच्चों को नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों और खेलों में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा बालवाटिका में ग्राउंड बॉक्स/ज्वाइंट पिटारा उपलब्ध कराने और उसका उपयोग सुनिश्चित करने की बात भी निर्देशों में कही गई है।
शत-प्रतिशत नामांकन और न्यूनतम 70 प्रतिशत उपस्थिति का लक्ष्य
को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्र अथवा बालवाटिका के क्षेत्र में आने वाले सभी 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही पूर्व प्राथमिक शिक्षा के लिए बच्चों की न्यूनतम 70 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विद्यालय स्तर पर अभिभावकों से संपर्क एवं समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।
बाल-मित्र हैंडवॉश यूनिट और शौचालय की व्यवस्था
छोटे बच्चों की आवश्यकताओं को देखते हुए विद्यालय में संचालित बालवाटिका के लिए बाल-मित्र हैंडवॉश यूनिट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
विद्यालय में उपलब्ध स्थान के आधार पर बाल-मित्र शौचालय की सुविधा भी सुनिश्चित की जाएगी। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।
जनपद स्तर पर गठित होगा ईसीसीई कोर ग्रुप
बालवाटिका से संबंधित गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन और अनुश्रवण के लिए जनपद स्तर पर ईसीसीई कोर ग्रुप गठित किया जाएगा। यह समूह पूर्व प्राथमिक शिक्षा से संबंधित गतिविधियों की निगरानी और आवश्यक समन्वय का कार्य करेगा।
ईसीसीई कोर ग्रुप में जिला समन्वयक निपुण/प्रशिक्षण, नोडल स्टेट रिसोर्स ग्रुप सदस्य, डायट द्वारा नामित प्रवक्ता/नोडल डायट मेंटर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा नामित अकादमिक रिसोर्स समूह सदस्य, शिक्षक संकुल सदस्य तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा नामित बाल विकास परियोजना अधिकारी को शामिल किया जाएगा।
ईसीसीई कोर ग्रुप करेगा नामांकन और गतिविधियों की निगरानी
ईसीसीई कोर ग्रुप द्वारा विद्यालय, ब्लॉक और जनपद स्तर पर पूर्व प्राथमिक शिक्षा से संबंधित निर्धारित कार्यक्रमों और गतिविधियों के क्रियान्वयन की निगरानी की जाएगी। बच्चों के नामांकन और उपस्थिति की स्थिति की भी नियमित समीक्षा की जाएगी।
इसके अलावा को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों को विद्यालय परिसर में स्थानांतरित करने की आवश्यकता होने पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। बालवाटिकाओं के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने में भी यह समूह सहयोग करेगा।
अभिभावकों और समुदाय के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा
बालवाटिका की सफलता के लिए अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया है। अभिभावकों को पूर्व प्राथमिक शिक्षा के महत्व और बच्चों के विकास के लिए की जा रही गतिविधियों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
बच्चों की प्रगति से अभिभावकों को नियमित रूप से अवगत कराने के साथ-साथ उनके सहयोग से बच्चों की नियमित उपस्थिति और नामांकन सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
बच्चों के सर्वांगीण विकास पर रहेगा मुख्य फोकस
जारी दिशा-निर्देशों का व्यापक उद्देश्य बालवाटिकाओं में गुणवत्तापूर्ण, खेल आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण वातावरण तैयार करना है। इसके माध्यम से बच्चों को भाषा, साक्षरता और संख्याज्ञान के साथ-साथ शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक और सांस्कृतिक विकास के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
इन व्यवस्थाओं के माध्यम से 3 से 6 वर्ष की आयु में बच्चों की बुनियादी क्षमताओं को मजबूत करते हुए उन्हें कक्षा-1 में प्रवेश के बाद औपचारिक शिक्षा के लिए बेहतर ढंग से तैयार करने का प्रयास किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को शासन के निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
