जन्म पंजीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव: अब 2 साल से अधिक देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश से बनेगा जन्म प्रमाण पत्र

भारत सरकार द्वारा जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम संशोधन 2026 की राजपत्र अधिसूचना

नई दिल्ली: जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। यदि किसी बच्चे या व्यक्ति के जन्म की सूचना देने में दो साल से अधिक का समय बीत चुका है, तो अब केवल प्रशासनिक अधिकारियों की अनुमति से काम नहीं चलेगा। ऐसे मामलों में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class – JMFC) का औपचारिक आदेश अनिवार्य कर दिया गया है।

​यह बदलाव Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 के अंतर्गत किया गया है, जिसकी आधिकारिक अधिसूचना 6 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित की जा चुकी है।

​क्या हैं नए नियम?

​विलंब की अवधि के आधार पर पंजीकरण प्रक्रिया को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

  1. 1 वर्ष तक की देरी: इसके लिए सामान्य और पारंपरिक विलंबित पंजीकरण के नियम ही लागू रहेंगे।
  2. 1 वर्ष से 2 वर्ष के भीतर की देरी: यदि जन्म की सूचना 1 साल के बाद लेकिन 2 साल के भीतर दी जाती है, तो पंजीकरण जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM), या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश पर किया जा सकेगा। इसके लिए अधिकारी को घटना की सत्यता की जांच करनी होगी और निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।
  3. 2 वर्ष से अधिक की देरी: यदि जन्म या मृत्यु की घटना को दो साल से अधिक का समय बीत चुका है, तो पंजीकरण केवल उस क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र वाले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही संभव होगा। मजिस्ट्रेट द्वारा सत्यता की पूरी जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

​पहले क्या थी व्यवस्था?

​पुराने नियमों के तहत, वर्षों पुराने या लंबे समय से लंबित जन्म-मृत्यु पंजीकरण के मामलों का निपटारा प्रशासनिक अधिकारियों (जैसे जिला या कार्यपालक मजिस्ट्रेट) के स्तर पर ही हो जाता था। लेकिन नए संशोधन के बाद, 2 साल से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक जांच और मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे इस पूरी प्रक्रिया में कानूनी पारदर्शिता और औपचारिकता बढ़ गई है।

​आम जनता पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

​जिन नागरिकों का जन्म बहुत पहले हुआ था और किन्हीं कारणों से उनका जन्म प्रमाण पत्र अब तक नहीं बन पाया है, उन्हें अब सीधे स्थानीय रजिस्ट्रार के पास जाने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया का रुख करना पड़ सकता है। उन्हें आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होगा, और न्यायालय या मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा।

​महत्वपूर्ण सावधानी

​कानून में संशोधन भले ही हो चुका है, लेकिन यह संशोधित प्रावधान देश भर में किस तिथि से पूरी तरह प्रभावी होगा, इसकी आधिकारिक तिथि केंद्र सरकार द्वारा अलग से राजपत्र में अधिसूचित की जानी बाकी है। इसलिए, आवेदन करने से पहले नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय जन्म और मृत्यु पंजीकरण कार्यालय से संपर्क कर मौजूदा प्रक्रिया की पुष्टि अवश्य कर लें।

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