‘शिक्षक डायरी’: 23 जरूरी नियम, प्रारूप और संपूर्ण मार्गदर्शिका
- कक्षा 4, 5, 6, 7 और 8 के शिक्षकों के लिए उपयोगी।
- वार्षिक, मासिक, साप्ताहिक एवं दैनिक शिक्षण योजना बनाने में सहायक।
- साप्ताहिक शिक्षण योजना PDF डाउनलोड करने की सुविधा।
- शिक्षक डायरी क्या है?
- शिक्षक डायरी के मुख्य भाग
- 1. मुख्य आवरण एवं विद्यालय संबंधी विवरण
- 2. शिक्षक का संक्षिप्त परिचय एवं अध्यापक प्रोफाइल
- 3. सत्र में प्राप्त प्रशिक्षणों का विवरण
- शिक्षकवार साप्ताहिक समय-सारिणी
- शिक्षकों के लिए विभागीय अपील
- ✅ तीन महत्वपूर्ण हस्तपुस्तिकाओं का प्रयोग
- ✅ वार्षिक योजना से दैनिक योजना तक
- ✅ लगभग 100 कार्ययोजना प्रारूप
- ✅ सहयोगात्मक पर्यवेक्षण
- ✅ ध्यानाकर्षण की 18 शिक्षण तकनीकें
- ✅ शिक्षक और बच्चों के बीच आत्मीय संबंध
- शिक्षक डायरी – नियम एवं निर्देश
- 1. प्रार्थना सभा एवं घंटी की व्यवस्था
- 2. समयबद्धता एवं सहगामी गतिविधियां
- 3. अभिभावकों से नियमित संपर्क
- 4. शिक्षक का समय प्रबंधन
- 5. दैनिक कार्ययोजना का पालन
- 6. टाइम एंड मोशन शासनादेश का पालन
- 7. हस्तपुस्तिकाओं एवं ARP का सहयोग
- 8. DIKSHA पोर्टल की डिजिटल सामग्री
- 9. प्रिंट-रिच वातावरण एवं TLM
- 10. बच्चों को अभिव्यक्ति का अवसर
- 11. सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियां
- 12. पाठ्यपुस्तक के अतिरिक्त पुस्तकों का प्रयोग
- 13. अभ्यास पुस्तिकाओं की नियमित जांच
- 14. गृहकार्य एवं प्रोजेक्ट कार्य
- 15. सक्रिय पुस्तकालय
- 16. शिक्षण गतिविधि एवं TLM का स्पष्ट उल्लेख
- 17. साप्ताहिक कार्ययोजना की अवधि
- 18. बेसलाइन आकलन एवं उपचारात्मक शिक्षण
- 19. शिक्षक का स्व-आकलन
- 20. पर्यवेक्षण के प्रमुख बिंदु
- 21. डायरी का नियमित निरीक्षण
- 22. प्रतिदर्श योजना का अनुसरण
- 23. संपूर्ण पाठ्यक्रम का नियोजन
- वार्षिक कार्ययोजना कैसे बनाएं?
- प्राथमिक स्तर का उदाहरण
- उच्च प्राथमिक स्तर का उदाहरण
- उपचारात्मक शिक्षण Vs शिक्षक डायरी
- शिक्षक डायरी के नियमित उपयोग के प्रमुख लाभ
- 1. समय और ऊर्जा की बचत
- 2. कक्षा में बेहतर अनुशासन
- 3. कमजोर बच्चों पर विशेष ध्यान
- 4. प्रभावी पर्यवेक्षण
- 5. शिक्षक का आत्मविश्वास बढ़ता है
- 6. पाठ्यक्रम समय से पूरा करने में सहायता
- 7. बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार
- शिक्षक डायरी केवल रिकॉर्ड नहीं, शिक्षण का मार्गदर्शक है।
- निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग तथा समग्र शिक्षा अभियान की ओर से प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए तैयार की गई ‘शिक्षक डायरी’ शिक्षण कार्य को व्यवस्थित, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह डायरी केवल दैनिक कार्यों को लिखने की पुस्तिका नहीं, बल्कि शिक्षक की वार्षिक योजना, मासिक योजना, साप्ताहिक योजना और दैनिक शिक्षण योजना को व्यवस्थित करने वाली एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक मार्गदर्शिका है।
विशेष रूप से निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने, बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार करने तथा कक्षा शिक्षण को बाल-केंद्रित और गतिविधि आधारित बनाने में शिक्षक डायरी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
डायरी के मुख्य पृष्ठ पर ही एक प्रेरणादायक विचार दिया गया है-
“शिक्षण की योजना न बनाना, शिक्षण न करने की योजना बनाने जैसा है।”
यह विचार शिक्षक को यह संदेश देता है कि प्रभावी शिक्षण के लिए कक्षा में जाने से पहले पर्याप्त तैयारी और योजना आवश्यक है। जब शिक्षक पहले से यह निर्धारित कर लेते हैं कि किस दिन, किस कालांश में, किस विषय का कौन-सा पाठ, किस शिक्षण विधि और किन शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) के माध्यम से पढ़ाया जाना है, तो कक्षा शिक्षण अधिक व्यवस्थित, रोचक और प्रभावी हो जाता है।
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शिक्षक डायरी क्या है?
शिक्षक डायरी को शिक्षक की दैनिक शैक्षणिक योजना और शिक्षण कार्य का व्यवस्थित रिकॉर्ड माना जा सकता है। इसमें शिक्षक द्वारा पूरे सत्र के दौरान किए जाने वाले शिक्षण कार्य, प्रशिक्षण, समय-सारिणी, पाठ योजना, गतिविधियां, बच्चों के सीखने की स्थिति, उपचारात्मक शिक्षण तथा शिक्षक के स्व-आकलन आदि के लिए अलग-अलग प्रारूप दिए गए हैं।
इसका उद्देश्य शिक्षकों पर अतिरिक्त कागजी कार्यभार डालना नहीं, बल्कि उनके शिक्षण कार्य को पूर्व नियोजित, उद्देश्यपूर्ण और गुणवत्तापूर्ण बनाना है।
शिक्षक डायरी के मुख्य भाग
शिक्षक डायरी में शिक्षक की व्यक्तिगत जानकारी से लेकर वार्षिक शिक्षण योजना और दैनिक शिक्षण कार्य तक के लिए क्रमबद्ध प्रारूप उपलब्ध कराए गए हैं। इसके प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं।
1. मुख्य आवरण एवं विद्यालय संबंधी विवरण
शिक्षक डायरी के मुख्य आवरण पर उत्तर प्रदेश शासन, समग्र शिक्षा तथा निपुण भारत से संबंधित लोगो एवं विवरण दिए गए हैं।
डायरी के प्रारंभिक पृष्ठ पर सत्र एवं शिक्षक से संबंधित आवश्यक विवरण भरने के लिए स्थान उपलब्ध होता है। इसमें सामान्यतः निम्न जानकारी दर्ज की जाती है—
- शैक्षिक सत्र
- शिक्षक का नाम
- शिक्षक का पद
- विद्यालय का नाम
- विद्यालय का UDISE कोड
- अन्य आवश्यक विद्यालय संबंधी विवरण
इससे डायरी की पहचान संबंधित शिक्षक एवं विद्यालय से स्पष्ट रूप से जुड़ जाती है। शिक्षक का नाम, पद, विद्यालय और UDISE कोड जैसी जानकारी इसी भाग में दर्ज रहती है।
2. शिक्षक का संक्षिप्त परिचय एवं अध्यापक प्रोफाइल
डायरी के अगले भाग में शिक्षक की व्यक्तिगत, शैक्षिक और सेवा संबंधी जानकारी दर्ज करने के लिए अध्यापक प्रोफाइल का प्रारूप दिया गया है।
इसमें शिक्षक का पूरा नाम, मानव संपदा कोड (EHRMS Code), स्थायी पता, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और पासपोर्ट साइज फोटो का विवरण दर्ज किया जाता है। इसके साथ उच्चतम शैक्षणिक योग्यता, मुख्य विषय, BTC, D.El.Ed., B.Ed. जैसी व्यावसायिक प्रशिक्षण योग्यता, कुल शिक्षण अनुभव, प्रथम नियुक्ति की तिथि एवं जनपद तथा वर्तमान विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि, ब्लॉक और जनपद की जानकारी भी दर्ज होती है। डायरी में ब्लड ग्रुप, स्वास्थ्य संबंधी विशेष सूचना, व्यक्तिगत रुचि एवं हॉबी तथा आकस्मिक परिस्थिति में संपर्क के लिए वैकल्पिक मोबाइल नंबर का विवरण दर्ज करने की व्यवस्था भी है।
इस प्रोफाइल का उद्देश्य शिक्षक की आवश्यक जानकारी को एक ही स्थान पर व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रखना है।
3. सत्र में प्राप्त प्रशिक्षणों का विवरण
शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास के लिए समय-समय पर विभिन्न प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं। शिक्षक डायरी में इन प्रशिक्षणों का रिकॉर्ड रखने के लिए अलग से तालिका उपलब्ध है।
इसमें प्रशिक्षण का नाम, प्रशिक्षण की अवधि, शुरू होने और समाप्त होने की तिथि, कुल प्रशिक्षण दिवस, प्रशिक्षण का स्थान तथा प्रशिक्षण का माध्यम दर्ज किया जाता है। प्रशिक्षण ऑनलाइन हुआ या ऑफलाइन, इसका विवरण भी इसमें रखा जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर FLN, निपुण भारत, आधारशिला, ध्यानाकर्षण, शिक्षण संग्रह आदि से संबंधित प्रशिक्षणों का विवरण इसमें दर्ज किया जा सकता है।
शिक्षकवार साप्ताहिक समय-सारिणी
शिक्षक डायरी में शिक्षक के लिए साप्ताहिक टाइम टेबल का भी स्पष्ट प्रारूप दिया गया है। इसका उद्देश्य शिक्षक के कालांश एवं विषयवार शिक्षण कार्य को व्यवस्थित करना है।
समय-सारिणी में सोमवार से शनिवार तक 6 कार्यदिवसों के लिए प्रथम से आठवें कालांश तक की व्यवस्था रहती है और चौथे कालांश के बाद मध्यावकाश का उल्लेख होता है। इसमें शिक्षक अपने विषयवार शिक्षण कार्य के साथ पुस्तकालय, खेलकूद, स्काउटिंग एवं गाइडिंग, बाल संसद तथा अन्य विशेष दायित्वों और सहगामी गतिविधियों को भी दर्ज कर सकते हैं।
इससे शिक्षक को पूरे सप्ताह के शिक्षण कार्य और अन्य दायित्वों का स्पष्ट पूर्व नियोजन करने में सुविधा मिलती है।
शिक्षकों के लिए विभागीय अपील
शिक्षक डायरी में शिक्षकों के लिए विभाग की ओर से एक महत्वपूर्ण अपील भी दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को योजनाबद्ध एवं बाल-केंद्रित शिक्षण के लिए प्रेरित करना है।
✅ तीन महत्वपूर्ण हस्तपुस्तिकाओं का प्रयोग
शिक्षकों को शिक्षण कार्य को सरल और प्रभावी बनाने के लिए आधारशिला, ध्यानाकर्षण और शिक्षण संग्रह जैसी हस्तपुस्तिकाओं एवं उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया है।
इनके माध्यम से शिक्षक गतिविधि आधारित, बाल-केंद्रित और आनंददायी शिक्षण को अपनी कक्षा में लागू कर सकते हैं।
✅ वार्षिक योजना से दैनिक योजना तक
शिक्षण कार्य को सफल बनाने के लिए बड़ी योजना को छोटे और स्पष्ट भागों में विभाजित किया जाता है।
वार्षिक कार्ययोजना → मासिक कार्ययोजना → साप्ताहिक कार्ययोजना → दैनिक शिक्षण योजना
इस पूरी प्रक्रिया में दैनिक शिक्षण योजना सबसे महत्वपूर्ण इकाई है, क्योंकि इसी के आधार पर शिक्षक प्रतिदिन कक्षा में अपने शिक्षण कार्य को लागू करता है।
✅ लगभग 100 कार्ययोजना प्रारूप
शिक्षक डायरी में पूरे शैक्षणिक सत्र के शिक्षण कार्य को दर्ज करने के लिए लगभग 100 कार्ययोजना प्रारूप उपलब्ध कराए गए हैं। शिक्षक इन प्रारूपों में अपने विषय, पाठ, गतिविधि, शिक्षण विधि, TLM और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज कर सकते हैं।
✅ सहयोगात्मक पर्यवेक्षण
डायरी में सपोर्टिव सुपरविजन यानी सहयोगात्मक पर्यवेक्षण की व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया गया है।
ब्लॉक एवं जनपद स्तर के अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP), स्टेट रिसोर्स ग्रुप (SRG) तथा मेंटर्स द्वारा विद्यालयों का सहयोगात्मक पर्यवेक्षण किया जाता है। इसके दौरान कक्षा शिक्षण एवं विद्यालय की शैक्षणिक स्थिति का अवलोकन कर आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाता है।
डायरी के अंत में दिए गए संबंधित प्रपत्र में विद्यालय की शैक्षणिक स्थिति और शिक्षण गुणवत्ता का विवरण दर्ज किया जा सकता है।
✅ ध्यानाकर्षण की 18 शिक्षण तकनीकें
शिक्षक डायरी में ध्यानाकर्षण मॉड्यूल से जुड़ी शिक्षण तकनीकों को भी महत्व दिया गया है। इसमें दी गई 18 तकनीकों का उद्देश्य कक्षा को पारंपरिक और नीरस वातावरण से निकालकर बाल-केंद्रित, गतिविधि आधारित, आनंददायी और सहभागितापूर्ण बनाना है।
शिक्षक इन तकनीकों को आवश्यकता और विषय की प्रकृति के अनुसार कक्षा में प्रयोग कर सकते हैं।
✅ शिक्षक और बच्चों के बीच आत्मीय संबंध
शिक्षक डायरी को केवल औपचारिक रिकॉर्ड या कागजी खानापूर्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह शिक्षक और बच्चों के बीच प्रतिदिन होने वाले सीखने-सिखाने के अनुभवों को व्यवस्थित करने का माध्यम है।
एक अच्छी शिक्षण योजना बच्चों की सहभागिता बढ़ाती है और शिक्षक को यह समझने में मदद करती है कि किस बच्चे को किस प्रकार के अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है।
शिक्षक डायरी – नियम एवं निर्देश
शिक्षक डायरी में शिक्षकों के दैनिक कार्य, समय प्रबंधन, शिक्षण योजना, गतिविधियों और कक्षा व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। इन्हें शिक्षण कार्य की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से समझना चाहिए।
1. प्रार्थना सभा एवं घंटी की व्यवस्था
विद्यालय में प्रतिदिन प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाए। प्रत्येक कालांश के परिवर्तन के लिए निर्धारित समय पर घंटी बजाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
2. समयबद्धता एवं सहगामी गतिविधियां
प्रार्थना सभा में बच्चों की समय से उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा उन्हें विभिन्न पाठ्य एवं सह-पाठ्य गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाए।
3. अभिभावकों से नियमित संपर्क
बच्चों की विद्यालय में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उनके माता-पिता एवं अभिभावकों से लगातार संपर्क बनाए रखा जाए।
4. शिक्षक का समय प्रबंधन
शिक्षकों को शिक्षण कार्य शुरू होने से कम से कम 15 मिनट पहले विद्यालय पहुंचने तथा शिक्षण कार्य समाप्त होने के बाद लगभग 30 मिनट विद्यालय में रुककर अगले दिन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
5. दैनिक कार्ययोजना का पालन
शिक्षक द्वारा बनाई गई दैनिक कार्ययोजना को निर्धारित रूप से लागू किया जाए। बच्चों के हित में आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त कालांश की व्यवस्था भी की जा सकती है।
6. टाइम एंड मोशन शासनादेश का पालन
वार्षिक शिक्षण योजना तैयार करते समय संबंधित टाइम एंड मोशन शासनादेश में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार शिक्षण दिवस और कार्यों का नियोजन किया जाए।
7. हस्तपुस्तिकाओं एवं ARP का सहयोग
शिक्षक आधारशिला, ध्यानाकर्षण एवं शिक्षण संग्रह जैसी सामग्री का उपयोग करें। शिक्षण से संबंधित किसी समस्या या संशय की स्थिति में ARP का सहयोग लिया जाए।
8. DIKSHA पोर्टल की डिजिटल सामग्री
दैनिक शिक्षण की तैयारी करते समय DIKSHA पोर्टल पर उपलब्ध डिजिटल सामग्री, वीडियो और अन्य शैक्षणिक संसाधनों का अध्ययन किया जाए और आवश्यकता के अनुसार उन्हें शिक्षण में शामिल किया जाए।
9. प्रिंट-रिच वातावरण एवं TLM
कक्षा को सीखने के लिए आकर्षक बनाने हेतु चार्ट, पोस्टर, शब्द सामग्री, गणित किट, शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) तथा अन्य उपयोगी संसाधनों का प्रयोग किया जाए।
10. बच्चों को अभिव्यक्ति का अवसर
कक्षा में बच्चों को अपने अनुभव साझा करने, आपस में चर्चा करने, प्रश्न पूछने तथा अपनी कठिनाइयां खुलकर व्यक्त करने के पर्याप्त अवसर दिए जाएं।
11. सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियां
विद्यालय में समय-समय पर वाद-विवाद, कविता पाठ, अंत्याक्षरी, भाषण, कहानी, रचनात्मक लेखन तथा अन्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाए।
12. पाठ्यपुस्तक के अतिरिक्त पुस्तकों का प्रयोग
बच्चों के मानसिक एवं बौद्धिक विकास के लिए केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहते हुए अन्य ज्ञानवर्धक, साहित्यिक और रोचक पुस्तकों का भी प्रयोग किया जाए।
13. अभ्यास पुस्तिकाओं की नियमित जांच
बच्चों द्वारा कार्यपुस्तिका या अभ्यास पुस्तिका में किए गए कार्य की शिक्षक नियमित जांच करें। गलतियों को चिन्हित कर सुधार कराया जाए तथा आवश्यकतानुसार प्रधानाध्यापक अथवा पर्यवेक्षक द्वारा भी इसका अवलोकन किया जाए।
14. गृहकार्य एवं प्रोजेक्ट कार्य
बच्चों की क्षमता और स्तर के अनुसार गृहकार्य अथवा प्रोजेक्ट कार्य दिया जाए तथा अगले दिन उसके कार्य की जांच और आवश्यक फीडबैक दिया जाए।
15. सक्रिय पुस्तकालय
विद्यालय के पुस्तकालय को व्यवस्थित और सक्रिय रखा जाए। बच्चों को नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि उनमें पढ़ने की आदत विकसित हो।
16. शिक्षण गतिविधि एवं TLM का स्पष्ट उल्लेख
शिक्षक डायरी में शिक्षण गतिविधियों का विवरण स्पष्ट, संक्षिप्त और व्यवस्थित रूप से दर्ज किया जाए। साथ ही कक्षा में प्रयोग की गई TLM अथवा अन्य शिक्षण सामग्री का नाम भी लिखा जाए।
17. साप्ताहिक कार्ययोजना की अवधि
साप्ताहिक योजना 6 कार्यदिवसों के आधार पर बनाई जाती है। यदि किसी कारण से सप्ताह की शुरुआत बुधवार से होती है, तो संबंधित छह कार्यदिवसों के अनुसार योजना का निर्धारण किया जाएगा।
18. बेसलाइन आकलन एवं उपचारात्मक शिक्षण
बच्चों के प्रारंभिक अथवा बेसलाइन आकलन के आधार पर उनके सीखने के स्तर की पहचान की जाए। आवश्यकता के अनुसार बच्चों के समूह बनाए जाएं और अपेक्षित स्तर से पीछे रहने वाले बच्चों के लिए उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) की व्यवस्था की जाए।
19. शिक्षक का स्व-आकलन
प्रत्येक दिन शिक्षण कार्य पूरा करने के बाद शिक्षक अपने शिक्षण का निष्पक्ष स्व-आकलन करें। इसमें यह देखा जाए कि निर्धारित शिक्षण उद्देश्य किस सीमा तक प्राप्त हुआ और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
20. पर्यवेक्षण के प्रमुख बिंदु
सहयोगात्मक पर्यवेक्षक निर्धारित प्रमुख बिंदुओं के आधार पर कक्षा शिक्षण का अवलोकन कर सकते हैं और शिक्षक डायरी में आवश्यक अंक एवं टिप्पणी दर्ज कर सकते हैं।
21. डायरी का नियमित निरीक्षण
विद्यालय में आने वाले विभिन्न शैक्षणिक एवं पर्यवेक्षी अधिकारियों द्वारा शिक्षक डायरी का अवलोकन किया जा सकता है। इसलिए डायरी में शिक्षण योजना एवं संबंधित विवरण नियमित और व्यवस्थित रूप से दर्ज किया जाना चाहिए।
22. प्रतिदर्श योजना का अनुसरण
शिक्षक अपनी डायरी भरते समय विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रतिदर्श अथवा मॉडल के अनुसार दिवसवार पाठों और शिक्षण गतिविधियों का विभाजन करें।
23. संपूर्ण पाठ्यक्रम का नियोजन
पूरे शैक्षणिक सत्र के पाठ्यक्रम को विषयवार और दिवसवार विभाजित करके शिक्षण कार्य की योजना बनाई जाए। इससे पाठ्यक्रम समय से पूरा करने के साथ-साथ पुनरावृत्ति, आकलन और उपचारात्मक शिक्षण के लिए भी पर्याप्त समय मिल सकेगा।
वार्षिक कार्ययोजना कैसे बनाएं?
शिक्षक डायरी में वार्षिक कार्ययोजना को माहवार और दिवसवार बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए शिक्षक को पूरे पाठ्यक्रम का पहले से अध्ययन करके प्रत्येक पाठ के लिए आवश्यक शिक्षण दिवस निर्धारित करने चाहिए।
इसके बाद पाठों को सप्ताहवार विभाजित किया जाता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि एक सप्ताह में पूरा होने वाला पाठ अगले सप्ताह के लिए अनावश्यक रूप से दोहराया जाए। यदि किसी पाठ के लिए निर्धारित दिवस पूरे हो जाते हैं, तो शेष कार्यदिवसों में अगले पाठ को शुरू किया जा सकता है।
प्राथमिक स्तर का उदाहरण
मान लीजिए कक्षा 4 गणित के किसी पाठ के लिए कुल 12 शिक्षण दिवस निर्धारित किए गए हैं। छह कार्यदिवसों वाले सप्ताह में पहले सप्ताह के सभी 6 दिन उसी पाठ को दिए जाएंगे। दूसरे सप्ताह में शेष 6 दिन उसी पाठ को पढ़ाकर पूरा किया जा सकता है।
इसी प्रकार यदि कक्षा 5 हिन्दी के किसी पाठ के लिए 10 दिन निर्धारित हैं, तो पहले सप्ताह में 6 दिन और दूसरे सप्ताह में 4 दिन उस पाठ को दिए जाएंगे। दूसरे सप्ताह के शेष 2 दिनों में अगले पाठ की शुरुआत की जा सकती है।
उदाहरण के रूप में—
| सप्ताह | कक्षा | विषय | चयनित पाठ | कुल दिवस | सप्ताह में दिवस |
|---|---|---|---|---|---|
| सप्ताह 1 | 4 | गणित | पाठ-1 (संख्याएं) | 12 | 6 |
| सप्ताह 1 | 5 | हिन्दी | पाठ-1 (विमल इन्दु की विशाल किरणें) | 10 | 6 |
| सप्ताह 1 | 5 | अंग्रेजी | Lesson-1 (Don’t Give Up) | 11 | 6 |
| सप्ताह 2 | 4 | गणित | पाठ-1 (संख्याएं) | 12 | 6 |
| सप्ताह 2 | 5 | हिन्दी | पाठ-1 एवं पाठ-2 | 10 एवं आगे | 4 + 2 |
| सप्ताह 2 | 5 | अंग्रेजी | Lesson-1 एवं Lesson-2 | निर्धारित दिवस | 5 + 1 |
उच्च प्राथमिक स्तर का उदाहरण
उच्च प्राथमिक कक्षाओं में भी इसी प्रकार पाठों को निर्धारित शिक्षण दिवसों के अनुसार सप्ताहवार विभाजित किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए यदि कक्षा 6 गणित में किसी पाठ के लिए 10 दिन निर्धारित हैं, तो पहले सप्ताह में 6 दिन और दूसरे सप्ताह में 4 दिन देकर पाठ पूरा किया जाएगा। दूसरे सप्ताह के शेष 2 दिनों में अगले पाठ की शुरुआत की जा सकती है।
इसी तरह यदि कक्षा 7 विज्ञान में किसी पाठ के लिए 7 दिन निर्धारित हैं, तो पहले सप्ताह में 6 दिन तथा दूसरे सप्ताह में 1 दिन उस पाठ को दिया जा सकता है। दूसरे सप्ताह के बचे हुए 5 दिनों में अगले पाठ को शुरू किया जा सकता है।
उदाहरण—
| सप्ताह | कक्षा | विषय | चयनित पाठ | कुल शिक्षण दिवस | सप्ताहवार विभाजन |
|---|---|---|---|---|---|
| सप्ताह 1 | 6 | गणित | पाठ-1 प्राकृतिक संख्याएं | 10 | 6 |
| सप्ताह 1 | 7 | विज्ञान | पाठ-1 मानव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | 7 | 6 |
| सप्ताह 1 | 8 | हिन्दी | पाठ-1 वीणा वादिनी वर दे | 10 | 6 |
| सप्ताह 1 | 6 | सामाजिक विषय | पाठ-1 हमारा सौर मण्डल | 7 | 6 |
| सप्ताह 2 | 6 | गणित | पाठ-1 एवं पाठ-2 | निर्धारित दिवस | 4 + 2 |
| सप्ताह 2 | 7 | विज्ञान | पाठ-1 एवं पाठ-2 | निर्धारित दिवस | 1 + 5 |
| सप्ताह 2 | 8 | हिन्दी | पाठ-1 एवं पाठ-2 | 10 एवं आगे | 4 + 2 |
| सप्ताह 2 | 6 | सामाजिक विषय | पाठ-1 एवं पाठ-2 | निर्धारित दिवस | 1 + 5 |
एक प्रभावी दैनिक योजना में दिन एवं तिथि, कक्षा, विषय, पाठ या अध्याय, निर्धारित शिक्षण उद्देश्य, बच्चों का पूर्व ज्ञान, शिक्षण गतिविधि, शिक्षण विधि, बच्चों की सहभागिता, प्रयोग की जाने वाली TLM, आवश्यक डिजिटल सामग्री, अभ्यास कार्य, आकलन, गृहकार्य या प्रोजेक्ट कार्य, कमजोर बच्चों के लिए अतिरिक्त सहयोग तथा शिक्षक का स्व-आकलन शामिल किया जा सकता है।
इस प्रकार की योजना शिक्षक को कक्षा में बिना तैयारी के जाने से बचाती है और प्रत्येक कालांश को उद्देश्यपूर्ण बनाती है।
उपचारात्मक शिक्षण Vs शिक्षक डायरी
कक्षा में सभी बच्चे समान गति से नहीं सीखते। कुछ बच्चे निर्धारित अधिगम स्तर तक जल्दी पहुंच जाते हैं, जबकि कुछ बच्चों को अतिरिक्त समय और अभ्यास की आवश्यकता होती है।
ऐसे बच्चों की पहचान के लिए बेसलाइन आकलन और नियमित मूल्यांकन महत्वपूर्ण हैं।
शिक्षक डायरी की सहायता से शिक्षक—
बच्चों का आकलन → सीखने की कमी की पहचान → समूह निर्माण → उपचारात्मक गतिविधि → पुनः आकलन
की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ा सकते हैं।
इससे केवल पाठ्यक्रम पूरा करना ही उद्देश्य नहीं रहता, बल्कि यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि बच्चे वास्तव में सीख भी रहे हैं।
शिक्षक डायरी के नियमित उपयोग के प्रमुख लाभ
1. समय और ऊर्जा की बचत
जब शिक्षक पहले से यह निर्धारित कर लेते हैं कि कक्षा में क्या और कैसे पढ़ाना है, तो कालांश का समय अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता है।
2. कक्षा में बेहतर अनुशासन
पूर्व नियोजित गतिविधियों के कारण बच्चों को लगातार सीखने में व्यस्त रखा जा सकता है। इससे कक्षा में अनावश्यक समय व्यर्थ होने की संभावना कम होती है।
3. कमजोर बच्चों पर विशेष ध्यान
बच्चों के आकलन और उपचारात्मक शिक्षण की योजना दर्ज रहने से कमजोर बच्चों के लिए विशेष गतिविधियां तैयार करना आसान होता है।
4. प्रभावी पर्यवेक्षण
जब ARP, मेंटर या अन्य शैक्षणिक अधिकारी विद्यालय का अवलोकन करते हैं, तो शिक्षक डायरी से शिक्षण योजना और कार्य की स्थिति समझने में सहायता मिलती है।
5. शिक्षक का आत्मविश्वास बढ़ता है
पूर्व तैयारी से शिक्षक को कक्षा में विषय समझाने, गतिविधि कराने और बच्चों की समस्याओं का समाधान करने में अधिक आत्मविश्वास मिलता है।
6. पाठ्यक्रम समय से पूरा करने में सहायता
जब पूरे सत्र के पाठ्यक्रम को पहले से दिवसवार और सप्ताहवार विभाजित किया जाता है, तो पाठ्यक्रम को समयबद्ध तरीके से पूरा करना आसान होता है।
7. बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार
योजनाबद्ध, गतिविधि आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण से बच्चों की सहभागिता बढ़ती है तथा उनके अधिगम स्तर में सुधार लाने में सहायता मिलती है।
शिक्षक डायरी केवल रिकॉर्ड नहीं, शिक्षण का मार्गदर्शक है।
शिक्षक डायरी का वास्तविक उद्देश्य केवल यह देखना नहीं है कि शिक्षक ने किस दिन कौन-सा पाठ पढ़ाया। इसका उद्देश्य शिक्षण की पूरी प्रक्रिया को योजनाबद्ध, व्यवस्थित, बाल-केंद्रित और परिणामोन्मुख बनाना है।
यदि शिक्षक वार्षिक योजना से लेकर दैनिक शिक्षण योजना तक सभी स्तरों पर नियमित रूप से योजना बनाते हैं, बच्चों की सीखने की स्थिति का आकलन करते हैं, कमजोर बच्चों के लिए उपचारात्मक शिक्षण करते हैं और अपने शिक्षण का स्व-आकलन करते हैं, तो शिक्षक डायरी वास्तव में एक प्रभावी शैक्षणिक उपकरण बन जाती है।
इसी कारण शिक्षक डायरी को केवल निरीक्षण के समय दिखाने वाली पुस्तिका के रूप में नहीं, बल्कि प्रतिदिन के शिक्षण कार्य की साथी और मार्गदर्शक के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक डायरी का महत्व केवल दैनिक कार्य लिखने तक सीमित नहीं है। यह शिक्षक के शैक्षणिक नियोजन, समय प्रबंधन, पाठ्यक्रम विभाजन, कक्षा शिक्षण, TLM के प्रयोग, बच्चों के आकलन, उपचारात्मक शिक्षण, स्व-आकलन और शैक्षणिक पर्यवेक्षण को एक साथ जोड़ने का कार्य करती है।
शिक्षक यदि डायरी में दिए गए निर्देशों को केवल औपचारिकता न मानकर अपनी दैनिक शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाएं, तो कक्षा शिक्षण अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो सकता है।
एक अच्छी योजना बेहतर शिक्षण की पहली सीढ़ी है और शिक्षक डायरी इसी योजनाबद्ध शिक्षण को व्यवहार में उतारने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
