Bagless Day: 12 सितंबर को परिषदीय विद्यालयों में कराई जाने वाली गतिविधियां, जानें चरणबद्ध पूरी प्रक्रिया

बैगलेस डे 12 सितंबर 2026 जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन गतिविधि
बैगलेस डे पर जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन गतिविधि
HIGHLIGHTS
  1. गतिविधि का दिन: 12 सितम्बर 2026 (द्वितीय शनिवार)
  2. गतिविधि का नाम: जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन

12 सितंबर 2026, द्वितीय शनिवार को विद्यालयों में निर्धारित कार्यक्रम के तहत ‘जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन अध्ययन’ गतिविधि आयोजित की जाएगी। इस गतिविधि का उद्देश्य विद्यार्थियों को जल के महत्व, जल संरक्षण की आवश्यकता और वर्षा जल के उचित उपयोग के बारे में व्यवहारिक जानकारी देना है। गतिविधि को केवल कक्षा में जानकारी देने तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को विद्यालय परिसर का निरीक्षण, चर्चा, समूह कार्य और प्रस्तुतीकरण से जोड़ा जाए, ताकि वे जल संरक्षण को वास्तविक जीवन से जोड़कर समझ सकें।

गतिविधि का उद्देश्य

इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाया जाएगा कि जल हमारे जीवन के लिए आवश्यक प्राकृतिक संसाधन है। पीने, भोजन बनाने, स्वच्छता, पौधों की देखभाल और अन्य दैनिक कार्यों के लिए पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए पानी का अनावश्यक उपयोग और बर्बादी रोकना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

विद्यार्थियों को यह भी बताया जाएगा कि वर्षा के दौरान बड़ी मात्रा में पानी बहकर व्यर्थ चला जाता है। यदि उचित व्यवस्था की जाए तो वर्षा के पानी को एकत्र किया जा सकता है और उपयुक्त तकनीकी व्यवस्था के माध्यम से उसका उपयोग या भू-जल पुनर्भरण किया जा सकता है।

चरण 1: जल के महत्व पर विद्यार्थियों से संवाद

गतिविधि की शुरुआत विद्यार्थियों के साथ बातचीत से की जाए। शिक्षक बच्चों से पूछें कि पानी हमारे जीवन में क्यों जरूरी है और इसका उपयोग किन-किन कार्यों में किया जाता है। बच्चों को अपने अनुभव के आधार पर उत्तर देने का अवसर दिया जाए।

इसके बाद शिक्षक पूछें कि विद्यालय में पानी कहां से आता है और इसका उपयोग किन स्थानों पर किया जाता है। विद्यार्थी नल, हैंडपंप, पानी की टंकी, हैंडवॉश स्टेशन, शौचालय, रसोई और पौधों की सिंचाई आदि के उदाहरण दे सकते हैं।

बच्चों के सामने एक और प्रश्न रखा जाए—“यदि हमारे घर या विद्यालय में एक दिन पानी उपलब्ध न हो तो क्या होगा?” विद्यार्थियों के उत्तर सुनने के बाद शिक्षक समझाएं कि पानी की उपलब्धता हमारे दैनिक जीवन की प्रत्येक गतिविधि से जुड़ी है। इसलिए पानी को बचाना केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी का दायित्व है।

चरण 2: विद्यालय में जल स्रोतों का निरीक्षण

इसके बाद विद्यार्थियों को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर विद्यालय परिसर का निरीक्षण कराया जाए। प्रत्येक समूह को विद्यालय में पानी के उपयोग और उपलब्ध जल स्रोतों का ध्यानपूर्वक निरीक्षण करने के लिए कहा जाए।

विद्यार्थी यह देखें कि विद्यालय में पानी कहां-कहां उपलब्ध है, उसका उपयोग किस कार्य में किया जाता है और कहीं पानी अनावश्यक रूप से तो नहीं बह रहा है। नलों, पाइपों, पानी की टंकी, हैंडवॉश स्टेशन और अन्य स्थानों का निरीक्षण कराया जा सकता है।

बच्चों से विशेष रूप से यह पता लगाने को कहा जाए कि कहीं नल से पानी टपक तो नहीं रहा, किसी पाइप में रिसाव तो नहीं है अथवा टंकी भरने के बाद पानी व्यर्थ तो नहीं बह रहा। इसी दौरान विद्यार्थी यह भी देखें कि विद्यालय की छत से बारिश का पानी किस दिशा में बहता है और बारिश का पानी वर्तमान में किस प्रकार बाहर निकलता है।

निरीक्षण के बाद प्रत्येक समूह अपने निष्कर्ष कॉपी में लिखे। इससे बच्चों को अपने आसपास की जल व्यवस्था को समझने और उसमें सुधार की संभावनाएं खोजने का अवसर मिलेगा।

चरण 3: जल की बर्बादी और उसके समाधान पर चर्चा

निरीक्षण पूरा होने के बाद सभी विद्यार्थियों को एक साथ बैठाकर चर्चा कराई जाए। प्रत्येक समूह से पूछा जाए कि उन्हें निरीक्षण के दौरान क्या-क्या दिखाई दिया।

यदि किसी स्थान पर पानी की बर्बादी दिखाई देती है तो विद्यार्थियों से ही उसका समाधान पूछा जाए। उदाहरण के लिए, नल खुला छोड़ने की स्थिति में उपयोग के बाद नल बंद करने, पाइप में रिसाव होने पर उसकी मरम्मत कराने और पानी की टंकी से पानी बहने की स्थिति में उचित निगरानी रखने जैसे उपायों पर चर्चा की जाए।

शिक्षक बच्चों को समझाएं कि जल संरक्षण के लिए हमेशा किसी बड़े अभियान की आवश्यकता नहीं होती। नल को आवश्यकता के समय ही खोलना, उपयोग के बाद बंद करना, रिसाव की सूचना देना और पानी का आवश्यकता के अनुसार उपयोग करना भी जल संरक्षण का हिस्सा है।

चरण 4: वर्षा जल संचयन को समझना

अब विद्यार्थियों को वर्षा जल संचयन के बारे में समझाया जाए। शिक्षक सरल भाषा में बताएं कि बारिश के पानी को बहकर व्यर्थ जाने देने के बजाय उसे उचित व्यवस्था के माध्यम से एकत्र करना, सुरक्षित रखना अथवा उपयुक्त तकनीकी व्यवस्था द्वारा भू-जल पुनर्भरण के लिए उपयोग करना वर्षा जल संचयन कहलाता है।

बच्चों का ध्यान विद्यालय की छत की ओर दिलाया जाए और बताया जाए कि बारिश के समय छत पर काफी मात्रा में पानी गिरता है। यदि उचित व्यवस्था उपलब्ध हो तो छत से इस पानी को पाइप के माध्यम से नीचे लाया जा सकता है। इसके बाद उपयुक्त फिल्टर की सहायता से पत्तियों, धूल और अन्य मोटे कणों को अलग करके पानी को संग्रहण टंकी तक पहुंचाया जा सकता है।

जहां उपयुक्त तकनीकी व्यवस्था हो, वहां वर्षा जल को रिचार्ज पिट अथवा अन्य भू-जल पुनर्भरण संरचना के माध्यम से जमीन में पहुंचाया जा सकता है। विद्यार्थियों को यह भी बताया जाए कि वास्तविक वर्षा जल संचयन व्यवस्था तैयार करते समय स्थानीय परिस्थितियों और तकनीकी मानकों का ध्यान रखना आवश्यक है।

चरण 5: वर्षा जल संचयन का चित्र बनाकर समझाएं

वर्षा जल संचयन की प्रक्रिया को बच्चों के लिए आसान बनाने के लिए शिक्षक बोर्ड पर इसका सरल चित्र बनाएं।

वर्षा → विद्यालय की छत → पाइप → फिल्टर → संग्रहण टंकी/भू-जल पुनर्भरण

चित्र बनाते समय प्रत्येक चरण को समझाया जाए। बारिश का पानी छत पर गिरता है, वहां से पाइप के माध्यम से नीचे आता है, फिल्टर से होकर गुजरता है और फिर उचित व्यवस्था के अनुसार संग्रहित किया जा सकता है या भू-जल पुनर्भरण में इस्तेमाल किया जा सकता है।

यदि विद्यालय में पहले से वर्षा जल संचयन की व्यवस्था है तो विद्यार्थियों को वास्तविक व्यवस्था का निरीक्षण कराया जाए। यदि ऐसी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है तो चार्ट या सरल मॉडल के माध्यम से प्रक्रिया समझाई जा सकती है।

चरण 6: विद्यार्थियों से समूह कार्य कराएं

अब विद्यार्थियों को छोटे समूहों में बांटकर जल संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित रचनात्मक कार्य पोस्टर के माध्यम से कराया जाए।

समूह 1: ‘जल बचाओ, जीवन बचाओ’

समूह 2: वर्षा जल संचयन का चित्र बनाए।

समूह 3: पानी की बर्बादी के कारण और उनके समाधान

समूह 4: विद्यालय का सरल नक्शा बनाकर जल स्रोतों तथा बारिश के पानी के बहाव को चिन्हित करे।

इस कार्य के दौरान शिक्षक विद्यार्थियों को आवश्यक मार्गदर्शन दें, लेकिन उन्हें अपने विचार रखने और समाधान खोजने का पूरा अवसर दें।

पोस्टर में विद्यार्थी “जल बचाओ, जीवन बचाओ”, “जल की हर बूंद कीमती है”, “वर्षा जल बचाएं, भू-जल बढ़ाएं” जैसे संदेश लिख सकते हैं।

चरण 7: समूह कार्य का प्रस्तुतीकरण

समूह कार्य पूरा होने के बाद प्रत्येक समूह को अपना कार्य कक्षा के सामने प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए। विद्यार्थी बताएंगे कि उन्होंने क्या देखा, क्या सीखा और जल संरक्षण के लिए उन्होंने कौन-से सुझाव दिए।

वर्षा जल संचयन वाले समूह से छत से पानी एकत्र करने से लेकर संग्रहण या भू-जल पुनर्भरण तक की प्रक्रिया समझाने के लिए कहा जा सकता है। शिक्षक विद्यार्थियों के प्रस्तुतीकरण के बाद आवश्यक जानकारी जोड़ते हुए विषय को स्पष्ट करें।

चरण 8: जल संरक्षण का संकल्प

गतिविधि के अंतिम चरण में विद्यार्थियों को जल संरक्षण का संकल्प दिलाया जाए—

“मैं जल के महत्व को समझते हुए पानी की अनावश्यक बर्बादी नहीं करूंगा/करूंगी। मैं आवश्यकता के अनुसार ही पानी का उपयोग करूंगा/करूंगी और नल को खुला नहीं छोड़ूंगा/छोड़ूंगी। पानी के किसी भी रिसाव की जानकारी संबंधित व्यक्ति को दूंगा/दूंगी। मैं जल संरक्षण के प्रति स्वयं जागरूक रहूंगा/रहूंगी तथा अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी जल संरक्षण के लिए प्रेरित करूंगा/करूंगी।”

संकल्प के बाद विद्यार्थियों की सामूहिक फोटो ली जा सकती है।

गतिविधि का दस्तावेजीकरण ऐसे करें

गतिविधि का दस्तावेजीकरण करते समय केवल एक सामूहिक फोटो लेने के बजाय पूरी गतिविधि के अलग-अलग चरणों की फोटो लेना बेहतर रहेगा। फोटो में शिक्षक द्वारा जल संरक्षण पर चर्चा, विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय के जल स्रोतों का निरीक्षण, वर्षा जल संचयन का अध्ययन, पोस्टर/चार्ट निर्माण, समूह प्रस्तुतीकरण और जल संरक्षण संकल्प जैसे चरण शामिल किए जा सकते हैं।

विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए पोस्टर, चार्ट, विद्यालय का जल स्रोत संबंधी नक्शा और अन्य कार्यों को भी सुरक्षित रखा जाए। गतिविधि के रिकॉर्ड में तिथि, गतिविधि का नाम, विद्यार्थियों की सहभागिता, गतिविधि के प्रमुख चरण, निष्कर्ष और फोटो साक्ष्य शामिल किए जा सकते हैं।

गतिविधि के बाद विद्यार्थियों के लिए अध्ययन कार्य

गतिविधि को विद्यालय से घर तक जोड़ने के लिए विद्यार्थियों को अपने घर में एक दिन पानी के उपयोग का निरीक्षण करने को कहा जा सकता है। वे यह लिखें कि घर में पानी का उपयोग किन कार्यों में होता है, कहीं पानी की बर्बादी तो नहीं होती और पानी बचाने के लिए कौन-कौन से उपाय अपनाए जा सकते हैं।

अगले अवसर पर विद्यार्थियों से उनके अनुभव साझा कराए जा सकते हैं। इससे जल संरक्षण की सीख केवल एक दिन की गतिविधि न रहकर बच्चों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन सकती है।

गतिविधि की संक्षिप्त आख्या

दिनांक 12 सितंबर 2026 को विद्यालय में ‘जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन अध्ययन’ गतिविधि का आयोजन किया गया। गतिविधि के अंतर्गत विद्यार्थियों को जल के महत्व एवं जल संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई। विद्यार्थियों से संवाद के बाद विद्यालय परिसर में उपलब्ध जल स्रोतों और पानी के उपयोग वाले स्थानों का निरीक्षण कराया गया। विद्यार्थियों ने पानी की बर्बादी के संभावित कारणों की पहचान की और उन्हें रोकने के उपायों पर चर्चा की।

इसके बाद विद्यार्थियों को वर्षा जल संचयन की अवधारणा और इसकी प्रक्रिया के बारे में बताया गया। छत पर गिरने वाले वर्षा जल को पाइप के माध्यम से एकत्र करने, उपयुक्त फिल्टर से साफ करने तथा संग्रहण या भू-जल पुनर्भरण के लिए उपयोग करने की प्रक्रिया को चित्र/चार्ट के माध्यम से समझाया गया।

विद्यार्थियों ने समूहों में जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन से संबंधित पोस्टर, चित्र और अन्य सामग्री तैयार की तथा अपने कार्य का प्रस्तुतीकरण किया। अंत में विद्यार्थियों को जल की अनावश्यक बर्बादी रोकने और अपने परिवार एवं आसपास के लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने का संकल्प दिलाया गया।

गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों में जल के महत्व, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के प्रति जागरूकता विकसित हुई तथा उन्हें जल संरक्षण के व्यवहारिक उपायों को समझने का अवसर मिला।

निष्कर्ष

इस गतिविधि का उद्देश्य बच्चों को केवल यह बताना नहीं है कि “पानी बचाना चाहिए”, बल्कि उन्हें यह समझाना है कि पानी कहां से आता है, उसका उपयोग कैसे होता है, उसकी बर्बादी कहां होती है और वर्षा के पानी को किस प्रकार संरक्षित किया जा सकता है। जब विद्यार्थी स्वयं विद्यालय की जल व्यवस्था का निरीक्षण करेंगे और उसके समाधान पर विचार करेंगे, तो जल संरक्षण उनके लिए एक व्यवहारिक विषय बन जाएगा।

जल संरक्षण की शुरुआत छोटी-छोटी आदतों से होती है। आज पानी की एक-एक बूंद बचाना ही आने वाले समय के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रयास है।

📥 गतिविधि 02 की PDF⁠ डाउनलोड करें
📌 प्रिंट करने हेतु यहाँ से आधिकारिक PDF सुरक्षित करें।

इसे भी देखें:

शेयर करें
WHATSAPP