शिक्षामित्रों की Special TET याचिका खारिज, देखें इलाहाबाद हाईकोर्ट आदेश का सार

Special TET में शिक्षामित्रों की याचिका खारिज, इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश
HIGHLIGHTS
  1. Special TET: निर्धारित इन-सर्विस शिक्षकों के लिए
  2. शिक्षामित्रों की मांग: स्वीकार नहीं की गई

Special TET 2026: उत्तर प्रदेश में स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा (Special TET) में शामिल होने की मांग को लेकर शिक्षामित्रों द्वारा दाखिल याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा आयोजित की जा रही Special TET का उद्देश्य सभी अभ्यर्थियों के लिए सामान्य TET का दूसरा मौका देना नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पहले से सेवा में कार्यरत शिक्षकों को TET की अनिवार्य योग्यता हासिल करने का अवसर देना है।

यह आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की अदालत ने Writ-A No. 15461 of 2026, Vaseem Ahamad and 220 others बनाम State of U.P. and 3 others में पारित किया।

221 शिक्षामित्रों ने दाखिल की थी याचिका

इस मामले में कुल 221 शिक्षामित्रों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 26 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं।

याचिका में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश सरकार के 2 सितंबर 2026 के शासनादेश तथा उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा जारी 3 सितंबर 2026 की अधिसूचना के उस हिस्से को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत शिक्षामित्रों को Special TET में आवेदन करने की पात्रता नहीं दी गई थी।

शिक्षामित्रों ने कोर्ट में क्या तर्क दिया?

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि TET शिक्षक पद के लिए निर्धारित आवश्यक योग्यता है और सुप्रीम कोर्ट ने पात्र इन-सर्विस शिक्षकों को TET हासिल करने के लिए समय दिया है। इसी क्रम में Special TET आयोजित की जा रही है।

शिक्षामित्रों का कहना था कि वे भी लंबे समय से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इसलिए उन्हें Special TET से बाहर रखना समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का हवाला देते हुए कहा कि समान परिस्थितियों में कार्य कर रहे शिक्षकों के बीच इस प्रकार का अंतर उचित नहीं है।

नियमित शिक्षकों के समान कार्य करने की दलील

याचिका में यह भी कहा गया कि शिक्षामित्र विद्यालयों में कई ऐसे कार्य करते हैं जो नियमित सहायक अध्यापकों द्वारा भी किए जाते हैं। इनमें दैनिक पाठ योजना, विद्यार्थियों की उपस्थिति, नामांकन एवं उपस्थिति बढ़ाने के लिए अभियान, मिड-डे मील से जुड़े कार्य तथा विभिन्न प्रशासनिक कार्य शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी उदाहरण दिया कि शिक्षामित्रों और नियमित सहायक अध्यापकों को एक साथ FLN (Foundation Literacy and Numeracy) प्रशिक्षण में शामिल किया गया था।

इसी आधार पर उनका तर्क था कि जब दोनों वर्ग विद्यालयों में शिक्षण एवं प्रशिक्षण से जुड़े कार्य कर रहे हैं तो शिक्षामित्रों को Special TET से पूरी तरह बाहर रखना उचित नहीं है।

सरकार और आयोग का जवाब

वहीं, प्रतिवादियों की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि Special TET का उद्देश्य सामान्य TET का दूसरा अवसर देना नहीं है।

सरकार की ओर से कहा गया कि 2 सितंबर 2026 का शासनादेश उन इन-सर्विस शिक्षकों के लिए जारी किया गया है जो पहले से सेवा में हैं और जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार TET की अनिवार्य योग्यता हासिल करनी है।

प्रतिवादियों ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता शिक्षामित्र अलग-अलग जिलों में कार्यरत हैं और याचिका में प्रत्येक याचिकाकर्ता के विद्यालय, सेवा संबंधी स्थिति और अन्य आवश्यक व्यक्तिगत विवरण पर्याप्त रूप से नहीं दिए गए हैं।

नियमित TET में शामिल होने का भी दिया गया हवाला

कोर्ट के सामने प्रतिवादियों की ओर से एक महत्वपूर्ण तर्क यह भी रखा गया कि 2, 3 और 4 जुलाई 2026 को नियमित TET परीक्षा आयोजित हुई थी।

प्रतिवादियों के अनुसार, याचिकाकर्ता उस नियमित TET में आवेदन करने और शामिल होने के पात्र थे, लेकिन उन्होंने उस परीक्षा में भाग नहीं लिया। नियमित TET का परिणाम 26 अगस्त 2026 को घोषित किया गया था।

हालांकि हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल नियमित TET में शामिल न होना अपने आप में शासनादेश की संवैधानिक वैधता तय करने वाला आधार नहीं है। कोर्ट ने Special TET के उद्देश्य और उसमें बनाई गई पात्रता की अलग से जांच की।

हाईकोर्ट ने Special TET का उद्देश्य क्या माना?

हाईकोर्ट ने कहा कि Special TET को नई भर्ती प्रक्रिया या किसी वर्ग को नियुक्ति में विशेष लाभ देने वाली व्यवस्था नहीं माना जा सकता।

कोर्ट के अनुसार, इसका मूल उद्देश्य ऐसे पहले से सेवा में कार्यरत शिक्षकों को TET की वह योग्यता हासिल करने का अवसर देना है, जो बाद में उनके लिए अनिवार्य हुई।

अर्थात Special TET को कोर्ट ने एक संक्रमणकालीन (Transitional) qualifying examination माना है। इससे किसी नए पद का सृजन नहीं होता और न ही परीक्षा पास करने मात्र से नियुक्ति या पदोन्नति का अधिकार प्राप्त होता है।

शिक्षामित्रों और पुराने नियमित शिक्षकों में अंतर क्यों माना गया?

हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षामित्रों और उन सहायक अध्यापकों की कानूनी स्थिति समान नहीं है, जो TET को अनिवार्य योग्यता बनाए जाने से पहले ही नियमित सेवा में नियुक्त हो चुके थे।

कोर्ट के अनुसार, पहले से सेवा में मौजूद उन शिक्षकों पर TET बाद में लागू हुई एक नई वैधानिक आवश्यकता थी। इसलिए उन्हें अपनी सेवा जारी रखने के लिए नई योग्यता हासिल करने का अवसर दिया गया है।

इसके विपरीत, शिक्षामित्र अलग संविदात्मक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं और उन्हें नियमित सहायक अध्यापक के समान नियमित पद पर नियुक्त कर्मचारी नहीं माना जा सकता।

अनुच्छेद 14 की दलील भी कोर्ट ने स्वीकार नहीं की

शिक्षामित्रों की ओर से Special TET से बाहर रखने को संविधान के अनुच्छेद 14 के विरुद्ध बताया गया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 14 हर व्यक्ति या हर वर्ग को बिल्कुल समान तरीके से व्यवहार किए जाने की मांग नहीं करता। यदि दो वर्ग कानूनी और तथ्यात्मक रूप से अलग हैं तथा उनके बीच किया गया वर्गीकरण किसी उचित उद्देश्य से जुड़ा है, तो अलग व्यवहार किया जा सकता है।

कोर्ट ने माना कि पहले से सेवा में मौजूद उन शिक्षकों और शिक्षामित्रों के नियुक्ति के तरीके, सेवा की स्थिति तथा TET लागू होने की परिस्थितियों में महत्वपूर्ण अंतर है।

Special TET से नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं

कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट करते हुए कहा कि Special TET पास करने मात्र से किसी शिक्षक को नियुक्ति, पदोन्नति या भविष्य की भर्ती में कोई स्वतः अधिकार नहीं मिलता।

Special TET केवल निर्धारित वर्ग के शिक्षकों को TET की योग्यता हासिल करने का अवसर प्रदान करती है। इसलिए इसे भर्ती प्रक्रिया मानना सही नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी आधार बनाया गया

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के Anjuman Ishaat-e-Taleem Trust मामले और उसके बाद के समीक्षा आदेश का उल्लेख किया।

कोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित इन-सर्विस शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता को स्वीकार किया था और बाद के आदेश में TET हासिल करने के लिए समयसीमा को 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाया गया। साथ ही सक्षम प्राधिकारियों को पात्र शिक्षकों को TET हासिल करने का उचित अवसर देने के लिए परीक्षा समय-समय पर आयोजित करने की बात कही गई।

हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का Special TET संबंधी शासनादेश सुप्रीम कोर्ट के इन्हीं निर्देशों को लागू करने के संदर्भ में जारी किया गया है।

हाईकोर्ट का अंतिम फैसला

सभी दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों की Special TET में शामिल किए जाने की मांग को स्वीकार नहीं किया।

कोर्ट ने माना कि Special TET में शामिल किए गए इन-सर्विस शिक्षकों और याचिकाकर्ता शिक्षामित्रों की कानूनी स्थिति अलग है। इसलिए शिक्षामित्र केवल इस आधार पर Special TET में शामिल होने का अधिकार नहीं मांग सकते कि वे सामान्य TET देने के लिए योग्य हैं।

अंततः हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2026 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया कि याचिकाकर्ताओं को इन-सर्विस शिक्षकों के लिए आयोजित Special TET में शामिल करने का निर्देश देने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। याचिका खारिज कर दी गई और लागत के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया गया।

शिक्षामित्रों के लिए इस आदेश का सीधा मतलब

इस फैसले का सीधा प्रभाव यह है कि 1 अक्टूबर 2026 के इस हाईकोर्ट आदेश के आधार पर शिक्षामित्रों को वर्तमान Special TET में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली है।

कोर्ट ने Special TET को विशेष रूप से उस वर्ग के लिए माना है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत अपनी सेवा जारी रखने के लिए TET की योग्यता हासिल करनी है।

साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि Special TET कोई नई भर्ती परीक्षा नहीं है और इसे सामान्य TET का दूसरा अवसर नहीं माना जा सकता।

आदेश की मुख्य बातें एक नजर में

बिंदुहाईकोर्ट का निष्कर्ष
याचिकाकर्ता221 शिक्षामित्र
याचिकाWrit-A No. 15461 of 2026
मुख्य मांगSpecial TET में शामिल करने की अनुमति
शासनादेश02 सितंबर 2026
अधिसूचना03 सितंबर 2026
Special TETनिर्धारित इन-सर्विस शिक्षकों के लिए
शिक्षामित्रों की मांगस्वीकार नहीं की गई
अनुच्छेद 14 की दलीलकोर्ट ने स्वीकार नहीं की
अनुच्छेद 16 की दलीलकोर्ट ने स्वीकार नहीं की
अंतिम निर्णययाचिका खारिज
आदेश की तारीख01 अक्टूबर 2026
📥 हाईकोर्ट आदेश की PDF डाउनलोड करें
📌 प्रिंट करने हेतु यहाँ से आधिकारिक PDF सुरक्षित करें।
↗ शेयर करें
WHATSAPP