यूपी में महिला सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, प्रसूति अवकाश की 2 साल की सीमा हटी
- पहले पूरे सेवाकाल में कुल 2 वर्ष की अधिकतम सीमा तय थी।
- अब 2 वर्ष की अधिकतम सीमा से संबंधित प्रावधान हटाया गया।
- यूपी में कार्यरत महिला सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा लाभ।
- महिला सरकारी कर्मचारियों को मिलता है 180 दिन का प्रसूति अवकाश
- प्रसूति अवकाश की 2 वर्ष की अधिकतम सीमा हटाने का निर्णय
- मेरिटर्निटी बेनिफिट एक्ट के अनुरूप किया गया बदलाव
- पहले से स्वीकृत प्रसूति अवकाश का क्या होगा?
- शासनादेश के बाद कब से लागू होगा नया नियम?
- किन महिला कर्मचारियों पर पड़ेगा असर?
- सरकार ने क्यों किया यह बदलाव?
- आदेश की मुख्य बातें एक नजर में
- महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह आदेश?
उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों के प्रसूति अवकाश (Maternity Leave) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। शासन द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश राज्यपाल अस्थायी नियम संग्रह खंड-2 के भाग-2 के नियम-153(1) में संशोधन किया गया है। इस बदलाव के तहत प्रसूति अवकाश से संबंधित उस प्रावधान को हटाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें महिला सरकारी कर्मचारियों को संपूर्ण सेवाकाल में अधिकतम 2 वर्ष की अवधि तक प्रसूति अवकाश दिए जाने की व्यवस्था थी।
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संशोधन से पहले जिन महिला सरकारी कर्मचारियों को पुराने नियमों के तहत प्रसूति अवकाश स्वीकृत किया जा चुका है, उनके मामलों में अलग व्यवस्था लागू होगी। सरकार ने ऐसे कर्मचारियों के लिए संक्रमणकालीन प्रावधान भी तय किए हैं।
उत्तर प्रदेश शासन के नियुक्ति अनुभाग-2 द्वारा जारी यह शासनादेश 2 सितंबर 2026 का है।
महिला सरकारी कर्मचारियों को मिलता है 180 दिन का प्रसूति अवकाश
अब तक लागू व्यवस्था के अनुसार, महिला सरकारी कर्मचारियों को प्रत्येक अवसर पर 180 दिन का प्रसूति अवकाश दिया जाता है। इस अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार वेतन और अन्य स्वीकृत सुविधाओं का लाभ मिलता है।
हालांकि पुराने नियम में यह प्रावधान भी शामिल था कि महिला सरकारी कर्मचारी को उसके पूरे सेवाकाल में मिलने वाले प्रसूति अवकाश की कुल अवधि 2 वर्ष से अधिक नहीं होगी। शासनादेश में इसी अधिकतम 2 वर्ष की सीमा से संबंधित प्रावधान में बदलाव किया गया है।
प्रसूति अवकाश की 2 वर्ष की अधिकतम सीमा हटाने का निर्णय
शासनादेश के अनुसार, प्रसूति अवकाश नियम में निर्धारित 2 वर्ष की संचयी/अधिकतम अवधि को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार ने आदेश में कहा है कि उक्त दो वर्ष की अवधि के कारण महिला सरकारी कर्मचारियों को आ रही कठिनाइयों के निवारण के उद्देश्य से नियम में संशोधन किया गया है। इसके लिए प्रसूति अवकाश नियम के संबंधित प्रावधान को हटाने की कार्रवाई की गई है।
इस बदलाव के बाद महिला सरकारी कर्मचारियों के प्रसूति अवकाश से संबंधित मामलों में पुराने नियम की 2 वर्ष की कुल सीमा पहले की तरह लागू नहीं रहेगी।
मेरिटर्निटी बेनिफिट एक्ट के अनुरूप किया गया बदलाव
शासनादेश में मेटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 के नियम-27 का भी उल्लेख किया गया है। सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों को प्रसूति अवकाश से संबंधित मामलों में आ रही कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए नियमों में संशोधन का निर्णय लिया है।
यह बदलाव विशेष रूप से उन महिला कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके प्रसूति अवकाश की कुल अवधि पुराने नियम में निर्धारित अधिकतम सीमा के करीब पहुंच चुकी थी या जिन्हें इस सीमा के कारण अवकाश संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
पहले से स्वीकृत प्रसूति अवकाश का क्या होगा?
शासनादेश में पहले से स्वीकृत प्रसूति अवकाश को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। सरकार ने कहा है कि आदेश जारी होने से पहले जिन महिला सरकारी कर्मचारियों को नियमों के तहत प्रसूति अवकाश स्वीकृत किया जा चुका है, उन्हें एक निश्चित व्यवस्था के तहत अवकाश का लाभ मिलता रहेगा।
आदेश के अनुसार, ऐसे मामलों में संबंधित कर्मचारी को पहले से स्वीकृत प्रसूति अवकाश की समाप्ति तिथि तक अवकाश का लाभ दिया जाएगा। साथ ही शासनादेश में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि पहले से स्वीकृत प्रसूति अवकाश की समाप्ति तिथि आदेश लागू होने की तिथि से आगे की है, तो संबंधित मामलों का निस्तारण संशोधित प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
इसलिए जिन महिला सरकारी कर्मचारियों का प्रसूति अवकाश पहले से स्वीकृत है, उनके मामले में आदेश की प्रभावी तिथि और स्वीकृत अवकाश की अवधि महत्वपूर्ण होगी।
शासनादेश के बाद कब से लागू होगा नया नियम?
जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह संशोधन शासनादेश लागू होने की तिथि से प्रभावी होगा।
इसका मतलब है कि प्रसूति अवकाश नियम में किया गया नया बदलाव शासन द्वारा निर्धारित प्रभावी तिथि से लागू माना जाएगा। संबंधित विभागों और कार्यालयों को भी शासनादेश के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
किन महिला कर्मचारियों पर पड़ेगा असर?
यह शासनादेश उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन कार्यरत महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से वे कर्मचारी जो प्रसूति अवकाश के नियमों और अधिकतम अवधि से संबंधित प्रावधानों के दायरे में आती हैं, उन्हें संशोधित नियमों की जानकारी रखना आवश्यक होगा।
हालांकि अलग-अलग विभागों में सेवा नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार कुछ औपचारिकताएं अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी व्यक्तिगत मामले में अवकाश की पात्रता और अवधि जानने के लिए संबंधित विभाग या कार्यालय से जानकारी लेना उचित रहेगा।
सरकार ने क्यों किया यह बदलाव?
शासनादेश के अनुसार, पुराने नियम में प्रसूति अवकाश की कुल 2 वर्ष की अवधि से संबंधित प्रावधान के कारण महिला सरकारी कर्मचारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इन्हीं समस्याओं के समाधान और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने नियम में संशोधन का निर्णय लिया है।
इस बदलाव के बाद प्रसूति अवकाश से जुड़े नियमों में पुरानी अधिकतम सीमा वाला प्रावधान समाप्त किया गया है।
आदेश की मुख्य बातें एक नजर में
| विवरण | नया बदलाव |
|---|---|
| संबंधित कर्मचारी | उत्तर प्रदेश की महिला सरकारी कर्मचारी |
| प्रत्येक अवसर पर प्रसूति अवकाश | 180 दिन |
| पुरानी व्यवस्था | पूरे सेवाकाल में कुल 2 वर्ष की अधिकतम सीमा |
| नया फैसला | 2 वर्ष की संचयी/अधिकतम सीमा से संबंधित प्रावधान हटाया गया |
| पुराने स्वीकृत मामले | शासनादेश में संक्रमणकालीन व्यवस्था दी गई |
| आदेश जारी होने की तिथि | 2 सितंबर 2026 |
| उद्देश्य | महिला कर्मचारियों को आ रही कठिनाइयों का निवारण |
महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह आदेश?
उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रसूति अवकाश नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पहले जहां प्रसूति अवकाश की कुल अवधि को लेकर 2 वर्ष की अधिकतम सीमा का प्रावधान था, वहीं अब शासन ने इस प्रावधान में संशोधन कर उसे हटाने का निर्णय लिया है।
इससे प्रसूति अवकाश से संबंधित नियमों में बदलाव आया है और भविष्य के मामलों में संशोधित व्यवस्था के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि जिन कर्मचारियों के मामले पहले से चल रहे हैं या जिनका अवकाश पहले ही स्वीकृत हो चुका है, उनके लिए शासनादेश में अलग से व्यवस्था निर्धारित की गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों के प्रसूति अवकाश नियमों में बड़ा संशोधन किया है। शासनादेश के अनुसार, पूरे सेवाकाल में प्रसूति अवकाश की 2 वर्ष की अधिकतम संचयी सीमा से संबंधित प्रावधान को हटाने का निर्णय लिया गया है।
यह आदेश महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे प्रसूति अवकाश की पुरानी व्यवस्था में बदलाव आया है। जिन कर्मचारियों का अवकाश पहले से स्वीकृत है, उनके मामलों में शासनादेश में दिए गए संक्रमणकालीन प्रावधान लागू होंगे। इसलिए संबंधित महिला कर्मचारियों को अपने विभाग से संशोधित नियमों और व्यक्तिगत पात्रता की जानकारी अवश्य प्राप्त करनी चाहिए।

