अब विद्यालय समय में होंगी शिक्षक संकुल की मासिक बैठकें, जानें शासन के नए निर्देश

उत्तर प्रदेश में शिक्षक संकुल की मासिक बैठक के नए दिशा-निर्देश 2026

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षक संकुल की मासिक बैठकों को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। समग्र शिक्षा के अंतर्गत न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाली इन बैठकों को अब विद्यालय अवधि के भीतर आयोजित करने की व्यवस्था की गई है। शासन के निर्देशों के अनुसार, बैठकों का उद्देश्य शिक्षकों के बीच शैक्षणिक अनुभवों का आदान-प्रदान करना, शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना और विद्यार्थियों को निपुण लक्ष्य तक पहुंचाना है।

हर महीने तीसरे मंगलवार को होगी बैठक

निर्देशों के अनुसार, शिक्षक संकुल की मासिक बैठक प्रत्येक माह के तीसरे मंगलवार को आयोजित की जाएगी। यदि निर्धारित दिन अवकाश पड़ता है, तो बैठक अगले कार्यदिवस पर आयोजित की जाएगी। बैठक का समय मौसम के अनुसार निर्धारित किया गया है।

  • 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक: दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक।
  • 1 अक्टूबर से 31 मार्च तक: दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक।

इस समय-सारिणी के माध्यम से बैठकों को विद्यालय अवधि के भीतर संचालित करने पर जोर दिया गया है, ताकि शिक्षकों को विद्यालय समय के बाद बैठक में शामिल होने की आवश्यकता न पड़े।

रोटेशन के आधार पर शामिल होंगे शिक्षक

विद्यालयों में नियमित पठन-पाठन प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षकों की बैठक में सहभागिता रोटेशन के आधार पर सुनिश्चित की जाएगी। इससे एक ओर शिक्षक संकुल की बैठकें नियमित रूप से आयोजित हो सकेंगी, वहीं दूसरी ओर विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई भी सुचारू रूप से चलती रहेगी।

शिक्षकों की सहभागिता इस प्रकार व्यवस्थित की जाएगी कि बैठक के दौरान शैक्षणिक गतिविधियों और विद्यालय संचालन के बीच संतुलन बना रहे।

हर महीने अलग-अलग विद्यालयों में होगा आयोजन

शिक्षक संकुल की बैठकों को केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक और उपयोगी बनाने पर जोर दिया गया है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक माह बैठक अलग-अलग विद्यालयों में आयोजित की जाएगी।

इस व्यवस्था से शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में अपनाई जा रही अच्छी शिक्षण पद्धतियों, कक्षा प्रबंधन, शिक्षण सामग्री और नवाचारों को देखने तथा उनसे सीखने का अवसर मिलेगा। इसे पीयर लर्निंग यानी सहकर्मी शिक्षण की अवधारणा से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों की अलग-अलग बैठकें

बैठकों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों की बैठकें अलग-अलग आयोजित की जाएंगी। दोनों स्तरों के शिक्षकों के लिए एजेंडा आधारित चर्चा की व्यवस्था रहेगी, जिससे संबंधित कक्षाओं की शैक्षणिक जरूरतों और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर पर विशेष ध्यान दिया जा सके।

बैठकों में शिक्षण संबंधी समस्याओं, बच्चों की शैक्षिक प्रगति और कक्षा में सीखने के परिणामों पर चर्चा की जाएगी।

HOTS आधारित शिक्षण पर रहेगा विशेष जोर

शिक्षक संकुल की बैठकों में उच्च स्तरीय चिंतन कौशल यानी हायर ऑर्डर थिंकिंग स्किल्स (HOTS) को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में केवल तथ्यों को याद करने की क्षमता विकसित करना नहीं, बल्कि उन्हें सोचने, तर्क करने, विश्लेषण करने और समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रेरित करना है।

इसके लिए शिक्षकों को कक्षा में बच्चों से केवल ‘क्या’, ‘कब’ और ‘कहां’ जैसे प्रश्न पूछने के बजाय ‘क्यों’, ‘कैसे’ और ‘क्या अंतर है’ जैसे प्रश्न पूछने पर जोर दिया जाएगा।

पाठ योजना में केस स्टडी, चर्चा, वाद-विवाद और समस्या-समाधान आधारित गतिविधियों को शामिल करने पर भी बल दिया जाएगा। इससे बच्चों की तार्किक क्षमता और विषय की समझ को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

टीएलएम और नवाचारों का साझा होगा अनुभव

बैठकों में शिक्षकों द्वारा तैयार की गई शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM), कक्षा में अपनाए गए नवाचारों और सफल शिक्षण प्रयोगों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही शिक्षकों को अपनी सफलता की कहानियां साझा करने का अवसर मिलेगा।

इस प्रक्रिया से अन्य शिक्षक उपयोगी गतिविधियों को अपने विद्यालयों में अपनाने के लिए प्रेरित हो सकेंगे। बैठकों का फोकस ऐसी शिक्षण विधियों पर रहेगा, जिनसे बच्चों की सीखने की क्षमता और कक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ाई जा सके।

अधिकारियों को भी करना होगा बैठक का अनुश्रवण

शिक्षक संकुल बैठकों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों की सहभागिता पर भी जोर दिया गया है। निर्देशों के अनुसार, प्राचार्य डायट, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक), जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), खंड शिक्षा अधिकारी (BEO), डायट मेंटर, जिला समन्वयक (DC), राज्य संदर्भ समूह (SRG) और अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) द्वारा प्रतिमाह कम से कम एक संकुल बैठक में प्रतिभाग किया जाएगा।

इससे बैठकों में होने वाली चर्चाओं, शिक्षण गतिविधियों और शैक्षणिक सुधार के प्रयासों का अनुश्रवण किया जा सकेगा। साथ ही, निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को गति देने में मदद मिलेगी।

बैठकों के आयोजन के लिए मिलेगी अलग धनराशि

बैठकों को गुणवत्तापूर्ण बनाने, नवाचारों को प्रोत्साहित करने और टीएलएम के प्रदर्शन की व्यवस्था के लिए समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट के अंतर्गत राज्य परियोजना कार्यालय की ओर से विद्यालयों को अलग से धनराशि उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है।

इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य बैठकों को अधिक व्यवस्थित बनाना और उनमें उपयोगी शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

शिक्षकों और विद्यार्थियों को होगा लाभ

नई व्यवस्था से शिक्षक संकुल की बैठकों को अधिक समयबद्ध, व्यवस्थित और परिणामोन्मुखी बनाने की अपेक्षा है। विद्यालय अवधि में बैठक आयोजित होने से शिक्षकों को अतिरिक्त समय देने की परेशानी कम हो सकती है। वहीं, रोटेशन व्यवस्था से विद्यालयों में नियमित पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी।

अलग-अलग विद्यालयों में बैठक, शिक्षण सामग्री का प्रदर्शन और HOTS आधारित गतिविधियों पर चर्चा से शिक्षकों को नए प्रयोग सीखने का अवसर मिलेगा। इसका वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित होगा, जब बैठकों में व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा के साथ कक्षा शिक्षण में सीखे गए तरीकों को लागू भी किया जाएगा।

प्रमुख दिशा-निर्देश एवं समय-सारिणी

  1. बैठक का दिन एवं समय:
    • शिक्षक संकुल की बैठक प्रत्येक माह के तृतीय मंगलवार को आयोजित की जाएगी (अवकाश होने की दशा में अगले कार्यदिवस पर)।
    • 01 अप्रैल से 30 सितंबर तक: मध्याह्न 12:00 बजे से अपराह्न 2:00 बजे तक।
    • 01 अक्टूबर से 31 मार्च तक: अपराह्न 01:00 बजे से अपराह्न 3:00 बजे तक।
  2. रोटेशन के आधार पर प्रतिभाग:
    • विद्यालयों का पठन-पाठन सुचारू रूप से चलता रहे, इसके लिए शिक्षकों द्वारा बैठक में रोटेशन के आधार पर प्रतिभाग किया जाएगा।
  3. अलग-अलग विद्यालयों में आयोजन (पीयर लर्निंग):
    • शिक्षकों के मध्य परस्पर सीखने (Peer Learning) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संकुल बैठकें प्रत्येक माह भिन्न-भिन्न विद्यालयों में आयोजित की जाएंगी।
  4. प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर की पृथक बैठकें:
    • एजेंडा आधारित बैठकें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के लिए अलग-अलग आयोजित की जाएंगी।
  5. हॉट्स (HOTS) और नवाचारों पर रहेगा विशेष जोर:
    • बैठकों में इस बात पर गहन चर्चा होगी कि कक्षा-शिक्षण में Higher Order Thinking Skills (HOTS) को किस प्रकार प्रभावी बनाया जाए।
    • बच्चों से केवल तथ्यात्मक (‘क्या’, ‘कब’, ‘कहाँ’) प्रश्न पूछने के बजाय ‘क्यों’, ‘कैसे’, ‘क्या अंतर है’ जैसे विश्लेषणात्मक व तार्किक प्रश्न पूछने और पाठ योजना में केस स्टडी व वाद-विवाद को शामिल करने पर बल दिया जाएगा।
    • बैठकों में उत्कृष्ट शिक्षण पद्धतियों, सफलता की कहानियों (Success Stories) तथा टीएलएम (TLM) के प्रदर्शन को साझा किया जाएगा।
  6. अधिकारियों द्वारा अनुश्रवण:
    • प्राचार्य डायट, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक), बीएसए, बीईओ, डायट मेंटर, डीसी, एसआरजी और एआरपी द्वारा अनिवार्य रूप से प्रतिमाह एक संकुल बैठक में प्रतिभाग किया जाएगा ताकि ‘निपुण लक्ष्य’ की प्राप्ति सुनिश्चित हो सके।
  7. बजट एवं वित्तीय सहायता:
    • बैठकों के गुणवत्तापूर्ण आयोजन, नवाचारों एवं टीएलएम के प्रदर्शन हेतु समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना व बजट के तहत राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा विद्यालयों को अलग से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।

निष्कर्ष: शासन के इस नए आदेश से शिक्षकों को विद्यालय समय के बाद अतिरिक्त समय नहीं देना होगा, जिससे शिक्षक संगठनों में संतोष है। साथ ही, बैठकों को परिणामोन्मुखी बनाकर प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता में व्यापक सुधार लाने का लक्ष्य रखा गया है।

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