लर्निंग बाई डूइंग (LBD) कार्यक्रम हेतु 1688 स्कूलों के लिए ₹6.75 करोड़ जारी, देखें दिशानिर्देश

उत्तर प्रदेश के 1688 विद्यालयों में लर्निंग बाई डूइंग कार्यक्रम के लिए सामग्री खरीदने संबंधी आदेश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा को किताबों के दायरे से बाहर निकालकर व्यावहारिक और प्रयोगात्मक रूप देने की दिशा में समग्र शिक्षा अभियान ने बड़ा कदम उठाया है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय द्वारा प्रदेश के चयनित 1,688 उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में ‘लर्निंग बाई डूइंग’ (LBD) कार्यक्रम के संचालन हेतु कच्ची सामग्री (Consumables/Raw Material) क्रय करने के लिए ₹40,000 प्रति विद्यालय की दर से कुल ₹6,75,20,000.00 (छह करोड़ पचहत्तर लाख बीस हजार रुपये) की वित्तीय लिमिट जारी कर दी गई है।

राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी इस शासनादेश के तहत प्रदेश के सभी 75 जनपदों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को समयबद्ध और पारदर्शी क्रियान्वयन के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

प्रयोगात्मक और कौशल-युक्त शिक्षा

समग्र शिक्षा के तहत वर्ष 2024-25 में चयनित उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों के शिक्षकों को राज्य स्तर पर दो चरणों में विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस प्रशिक्षण में शिक्षकों को हैंड्स-ऑन-प्रैक्टिस (Hands-on Practice) के माध्यम से विज्ञान, गणित, पर्यावरण और दैनिक जीवन से जुड़े कौशलों की बारीकियों से रूबरू कराया गया था।

अब इस ₹40,000 प्रति विद्यालय के बजट से स्कूलों में स्थापित LBD प्रयोगशालाओं को आवश्यक सामग्रियों से सुसज्जित किया जाएगा, जिससे छात्र स्वयं अपने हाथों से मॉडल, प्रोजेक्ट और प्रयोग बनाकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर सकें।

समयबद्ध और पारदर्शी प्रक्रिया

वित्तीय संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए राज्य परियोजना कार्यालय ने स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की है:

  • 2 दिन के भीतर SMC खातों में अंतरण: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी का यह व्यक्तिगत दायित्व होगा कि राज्य स्तर से लिमिट जारी होने के 02 दिवस के अंदर सभी 1,688 विद्यालयों की विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) के खातों में यह धनराशि अंतरित करें।
  • 5 दिन के भीतर सामग्री क्रय: विद्यालय के प्रधानाध्यापक/इंचार्ज शिक्षक का उत्तरदायित्व होगा कि वे SMC के माध्यम से 05 दिवस के भीतर निर्धारित सामग्री की खरीद पूरी करें।
  • प्रबंध पोर्टल पर प्रविष्टि: बैंक खाते से वास्तविक डेबिट के उपरांत ही व्यय को ‘प्रबंध पोर्टल’ (Prabandh Portal) के Project Innovation Recurring के अंतर्गत Learning By Doing (Previous) मद में दर्ज किया जाएगा, जिसका कंपोनेंट कोड F.01.12.8 है।
  • विचलन पर पूर्ण प्रतिबंध: आवंटित बजट का उपयोग केवल स्वीकृत मद में ही होगा; किसी भी अन्य मद में धनराशि का विचलन मान्य नहीं होगा।

विज्ञान, तकनीक से लेकर जीवन कौशल तक

जारी आदेश के संलग्नक-1 में ₹40,000 के अंतर्गत कराई जाने वाली 40 विशिष्ट गतिविधियों और उनकी आवश्यक सामग्रियों का स्पष्ट मूल्य-निर्धारण किया गया है:

1. वैज्ञानिक उपकरण एवं मॉडल निर्माण

  • दूरदर्शी (टेलीस्कोप): उत्तल व अवतल लेंस, चार्ट पेपर और सेलो टेप की मदद से ऑप्टिक्स की समझ।
  • स्मार्टफोन प्रोजेक्टर: मैग्नीफाइंग लेंस, जूते के डिब्बे और दर्पण के सहारे प्रोजेक्शन तकनीक का प्रदर्शन।
  • सोलर ऊर्जा के प्रयोग: जूते के डिब्बे, काले पेंट और एल्युमिनियम फॉयल से सोलर कुकर तथा सोलर कार किट का निर्माण।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स व सर्किट: एलईडी, 9V बैटरी, स्विच, होल्डर, कॉपर टेप, पीको बजर और आर्डिनो यूनो/नैनो आधारित स्ट्रीट लाइट मॉडल।

2. व्यावहारिक जीवन कौशल व हस्तशिल्प

  • साइकिल रिपेयरिंग: पंक्चर लगाना, ट्यूब बदलना, ब्रेक रबर ठीक करना और ऑयलिंग की बुनियादी समझ।
  • काष्ठ व बोर्ड कार्य: MDF प्लाई बोर्ड, क्लिप और वॉलपेपर की मदद से छात्रों द्वारा स्वयं का एग्जाम पैड तैयार करना।
  • दीवार की पेंटिंग व डस्टर निर्माण: पुट्टी, प्राइमर, इमल्शन पेंट और ब्रश के माध्यम से कलात्मक अभिव्यक्ति तथा लकड़ी व स्पंज से ब्लैकबोर्ड डस्टर बनाना।
  • कपड़ों पर कढ़ाई व टाई-डाई: फ्रेम, धागे, कॉटन कपड़ा और प्राकृतिक रंगों (पालक, चुकंदर, हल्दी) से वस्त्र सज्जा।

3. कृषि, पर्यावरण एवं पोषण विज्ञान

  • वर्मी कंपोस्टिंग व टेरारियम: कांच के जार में मिनी इकोसिस्टम बनाना और कंपोस्ट बैग में केंचुए की खाद तैयार करना।
  • किचन गार्डन व नर्सरी: बेकार प्लास्टिक की बोतलों में पौधे लगाना, वर्टिकल ग्रो बैग और बांस की सहायता से नर्सरी विकसित करना।
  • पाक कला एवं खाद्य प्रसंस्करण: बिना आग के खाना (Non-Fire Cooking), दही जमाना, नींबू-मिर्च का अचार, सेब से जैम-जेली और पौष्टिक खिचड़ी तैयार करना।
  • ट्री-गार्ड निर्माण: ईंट, सीमेंट और मोरंग के मिश्रण से पौधों की सुरक्षा हेतु ट्री-गार्ड बनाना।

जनपदवार आवंटन: किस जिले को मिले कितने विद्यालय और बजट?

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में इस योजना का विस्तार किया गया है। सर्वाधिक बजट पाने वाले प्रमुख जिले इस प्रकार हैं:

क्र.सं.जनपदचयनित विद्यालयों की संख्याकुल आवंटित धनराशि (₹)
1प्रयागराज49₹ 19,60,000.00
2आजमगढ़44₹ 17,60,000.00
3गोरखपुर43₹ 17,20,000.00
4जौनपुर42₹ 16,80,000.00
5सीतापुर38₹ 15,20,000.00
6हरदोई, प्रतापगढ़, रायबरेली36 (प्रत्येक)₹ 14,40,000.00 (प्रत्येक)
7बलिया, बरेली, बुलंदशहर34 (प्रत्येक)₹ 13,60,000.00 (प्रत्येक)
8आगरा, बाराबंकी, बदायूं, गाजीपुर32 (प्रत्येक)₹ 12,80,000.00 (प्रत्येक)
—कुल प्रदेश (75 जनपद)1,688 विद्यालय₹ 6,75,20,000.00

गुणवत्ता, सुरक्षा और निरीक्षण का कड़ा पहरा

योजना केवल कागजों तक सीमित न रहे, इसके लिए त्रिस्तरीय निगरानी तंत्र और जवाबदेही तय की गई है:

  • घटिया सामग्री पर कड़ी कार्रवाई: प्रयोगशाला के लिए क्रय की गई सामग्री की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। मानकविहीन सामग्री मिलने पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक (सदस्य सचिव, SMC) के विरुद्ध सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
  • छात्रों की सुरक्षा अनिवार्य: सभी प्रायोगिक गतिविधियां प्रशिक्षित शिक्षकों की सीधी देखरेख में ही होंगी। प्रयोगशाला में बच्चों की सुरक्षा का संपूर्ण दायित्व संबंधित विद्यालय के अध्यापकों पर होगा।
  • प्रेरणा पोर्टल पर फोटो अपलोड: प्रत्येक माह LBD की चारों ट्रेडों की गतिविधियों की वास्तविक फोटो प्रेरणा ऐप/पोर्टल के DCF-LBD Activities Photo मॉड्यूल पर अपलोड करना अनिवार्य रहेगा।

अधिकारियों का मासिक निरीक्षण रोस्टर

  • डायट प्राचार्य: प्रतिमाह न्यूनतम 02 विद्यालयों का स्थलीय अनुश्रवण।
  • मंडलीय एडी (बेसिक): प्रतिमाह विभिन्न जिलों के न्यूनतम 04 विद्यालयों का निरीक्षण।
  • जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA): प्रतिमाह न्यूनतम 06 विद्यालयों का निरीक्षण एवं पोर्टल पर फोटो अपलोडिंग का सत्यापन।
  • जिला समन्वयक (सामुदायिक सहभागिता): प्रतिमाह कम से कम 08 विद्यालयों का निरीक्षण।
  • खंड शिक्षा अधिकारी (BEO): अपने ब्लॉक के चयनित LBD व पीएम-श्री विद्यालयों का नियमित अनुश्रवण।

राज्य परियोजना निदेशक द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि निर्धारित समय-सीमा के अंदर गतिविधियां शुरू कराकर उपभोग प्रमाण-पत्र (Utilization Certificate) मुख्यालय को प्रेषित करना सुनिश्चित करें।

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