अब स्कूल समय में ही होगी ‘शिक्षक संकुल’ की मासिक बैठक, जानें क्या हैं नए नियम

शिक्षक संकुल की मासिक बैठक अब स्कूल समय में आयोजित होने की जानकारी

​लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और शिक्षकों की सहूलियत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा, मोनिका रानी द्वारा 25 सितंबर 2026 को जारी एक नए शासनादेश के अनुसार, अब न्याय पंचायत स्तर पर होने वाली ‘शिक्षक संकुल’ की मासिक बैठकें शिक्षण अवधि के बाद नहीं, बल्कि स्कूल समय के दौरान ही आयोजित की जाएंगी। यह निर्णय निपुण भारत मिशन के तहत शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लिया गया है।

​क्या था पुराना नियम और क्यों हुआ बदलाव?

समग्र शिक्षा अभियान के तहत न्याय पंचायत स्तर पर ‘शिक्षक संकुल’ का गठन किया गया था। इससे पहले 27 जून 2022 को निपुण भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन और त्रैमासिक लक्ष्य निर्धारण के लिए जारी निर्देश में यह अनिवार्य किया गया था कि शिक्षक संकुल की बैठकें शिक्षण अवधि समाप्त होने के बाद (स्कूल के उपरांत) आयोजित की जाएं। इस व्यवस्था से शिक्षकों को स्कूल के बाद भी रुकना पड़ता था। लेकिन अब विभाग ने सम्यक् विचारोपरांत इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए इन बैठकों को विद्यालय अवधि में ही कराने का निर्णय लिया है।

​शिक्षक संकुल बैठकों का नया शेड्यूल

आदेश के अनुसार, बैठकों का आयोजन अब एक निश्चित दिन और समय पर होगा, ताकि पठन-पाठन भी प्रभावित न हो और बैठकों का उद्देश्य भी पूरा हो सके:

  • ​बैठक का दिन: यह बैठक प्रत्येक माह के तृतीय (तीसरे) मंगलवार को आयोजित की जाएगी। यदि उस दिन कोई सार्वजनिक अवकाश होता है, तो बैठक आगामी कार्यदिवस पर निर्धारित की जाएगी।
  • ​ग्रीष्मकालीन समय (01 अप्रैल से 30 सितम्बर तक): दोपहर 12:00 बजे से अपराह्न 2:00 बजे तक।
  • ​शीतकालीन समय (01 अक्टूबर से 31 मार्च तक): अपराह्न 01:00 बजे से अपराह्न 3:00 बजे तक।

​बैठक के मुख्य उद्देश्य और विशिष्ट मासिक लक्ष्य

इन बैठकों का सुझवात्मक एजेंडा राज्य परियोजना निदेशक (समग्र शिक्षा) द्वारा समय-समय पर भेजा जाएगा। बैठकों को केवल औपचारिकता न मानकर, इसके लिए कुछ विशिष्ट मासिक लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं:

  • ​लर्निंग आउटकम (Learning Outcome): छात्र-छात्राओं के सीखने की क्षमता में सुधार के लिए डेटा आधारित विश्लेषण करना और नए लक्ष्य निर्धारित करना।
  • ​पाठ्यक्रम की पूर्णता: शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार निर्धारित पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करना।
  • ​कैच-अप शिक्षण (Catch-up Teaching): आगामी माह में कितने बच्चों के साथ ‘कैच-अप’ शिक्षण किया जाना है, इसकी ठोस कार्ययोजना बनाना।
  • ​उपस्थिति में वृद्धि: स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए विशेष और प्रभावी रणनीतियां तैयार करना।
  • ​अभिभावक संपर्क: बच्चों के गृहकार्य (Homework) और अभ्यास कार्य पर विशेष फोकस करते हुए उनके अभिभावकों से निरंतर संपर्क स्थापित करना।

​अधिकारियों की होगी सख्त निगरानी और अनिवार्य उपस्थिति

इस आदेश की सबसे खास बात यह है कि इसे जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए उच्चाधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। शासनादेश के अनुसार, डायट प्राचार्य, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक), जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO), डायट मेंटर, जिला समन्वयक, एस०आर०जी० (SRG) और ए०आर०पी० (ARP) को प्रत्येक माह अनिवार्य रूप से इन बैठकों में प्रतिभाग करना होगा।

​इन सभी अधिकारियों का मुख्य कार्य ‘निपुण लक्ष्य’ की प्राप्ति के लिए शिक्षकों का मार्गदर्शन करना और उन्हें प्रेरित एवं प्रोत्साहित करना होगा।

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